
गुरुवाणी/ केन्द्र
जीवन में हो ईमानदारी की आराधना : आचार्यश्री महाश्रमण
अध्यात्म के महासूर्य आचार्यश्री महाश्रमणजी ने महावीर आध्यात्मिक समवसरण में आगमवाणी की अमृत वर्षा करते हुए फरमाया कि आत्मा की दृष्टि से ईमानदारी का अत्यधिक महत्व है। व्यावहारिक जीवन में भी ईमानदारी की अपनी गरिमा होती है। ईमानदारी सर्वोत्तम नीति है। ईमानदारी के दो प्रमुख आयाम प्रतीत होते हैं— चोरी न करना और झूठ-कपट से बचना। यदि ये दोनों सिद्धांत जीवन में समाहित हो जाएं, तो व्यक्ति पूर्ण रूप से ईमानदारी को आत्मसात कर सकता है। शास्त्रों में सच्चाई की महिमा का उल्लेख किया गया है—
'सांच बराबर तप नहीं, झूठ बराबर पाप।
जाके हृदय सांच है, ता हृदय प्रभु आप।।'
आचार्यश्री ने कहा कि झूठ बोलने वाले को हमेशा तनाव रहता है, जबकि सत्य बोलने वाले को कोई अंतर नहीं पड़ता। हालांकि, सत्य के मार्ग पर कठिनाइयाँ और परेशानियाँ आ सकती हैं, लेकिन सत्य कभी परास्त नहीं होता। अंततः जीत सच्चाई की ही होती है। आचार्य प्रवर ने न्याय के संबंध में कहा कि व्यक्ति अपने अधिकारों की रक्षा के लिए न्यायालय जा सकता है, लेकिन किसी को संकट में डालने या अन्याय करने के उद्देश्य से न्यायालय का उपयोग नहीं करना चाहिए। न्यायालय में न जाना भी एक संयम हो सकता है। तीन मार्ग होते हैं—
1. झूठ बोलना
2. सच बोलना
3. चुप रहना
हर स्थिति में सच उजागर करना आवश्यक नहीं होता, लेकिन जब बोलें तो छल-कपट रहित, विवेकपूर्ण और संयमित शब्दों में सत्य बोलें। ईमानदारी जीवन की अमूल्य संपत्ति है। पैसा इस जीवन तक साथ रहता है, लेकिन ईमानदारी आगे भी कल्याणकारी सिद्ध हो सकती है। लोक में सत्य ही सारभूत है। सच बोलने से विश्वास बना रहता है। बात भले ही कड़वी हो, लेकिन खरी हो तो स्थायित्व और प्रतिष्ठा बनी रहती है। यदि दुकानदार ईमानदार है, तो यह उसके व्यापार के लिए सबसे बड़ी उपलब्धि है। झूठ नहीं बोलने से पाप कर्मों से बचाव होता है, सच्चाई से चेतना निर्मल बनती है, विश्वास बढ़ता है और समाज में प्रतिष्ठा भी स्थापित होती है। हमें अपने जीवन में ईमानदारी की आराधना करनी चाहिए और झूठ-कपट तथा चोरी से बचने का प्रयास करना चाहिए।
पूज्यवर के स्वागत में कच्छ से संबद्ध साध्वी हेमलताजी, गांधीधाम से संबद्ध साध्वी मंगलयशाजी ने अपने हृदयोद्गार व्यक्त किए। श्री टोहाणा महाजन समाज से मोहनभाई धारशी, सिंधी समाज की ओर से डॉ. कुन्दनभाई गवलानी, तेरापंथ महिला मण्डल की अध्यक्ष मंजूबेन संघवी, टीपीएफ के अध्यक्ष मुदित जैन, तेरापंथ युवक परिषद के अध्यक्ष मुकेश सिंघवी ने अपनी अभिव्यक्ति दी। ‘बेटी तेरापंथ की’ से जुड़ी बेटियों, तेरापंथ कन्या मण्डल, ज्ञानशाला के ज्ञानार्थियों एवं तेरापंथ युवक परिषद ने अपनी भावपूर्ण प्रस्तुति दी।