बालस्स मंदयं बीयं, जं च कडं अवजाणई भुज्जो। मूढ़ की यह दूसरी मंदता है कि वह किए हुए पाप को नकारता है।
- आचार्य श्री भिक्षु महाराज
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12 February -18 February 2024

गुरुवाणी/ केन्द्र
शरीर रूपी नौका से भवसागर तरने के लिए करें धर्म साधना : आचार्यश्री महाश्रमण
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धन, ज्ञान और शक्ति के साथ हो चरित्र का बल : आचार्यश्री महाश्रमण
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मुंबई मर्यादा महोत्सव पर आचार्यश्री महाप्रज्ञजी द्वारा वि0सं0 2059 में समुच्चारित गीत
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मुंबई मर्यादा महोत्सव पर आचार्यश्री तुलसी द्वारा वि0सं0 2011 में समुच्चारित गीत
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