जीव द्रव्य प्रत्यक्ष शाश्वत है। उसकी संख्या तिलमात्र भी कभी नहीं घटती। उसके असंख्यात प्रदेशों में लेशमात्र भी घट बढ़ नहीं होती।
- आचार्य श्री भिक्षु
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जीव द्रव्य प्रत्यक्ष शाश्वत है। उसकी संख्या तिलमात्र भी कभी नहीं घटती। उसके असंख्यात प्रदेशों में लेशमात्र भी घट बढ़ नहीं होती।
- आचार्य श्री भिक्षु
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