उनकी बुद्धि ही परमार्थत: बुद्धि है जो जिनधर्म का सेवन करते हैं। वह बुद्धि किस काम की, जिससे कर्म का बंधन हो।

- आचार्य श्री भिक्षु महाराज

स्वाध्याय

धर्म है उत्कृष्ट मंगल

-आचार्यश्री महाश्रमण

02 March - 08 March 2026

धर्म है उत्कृष्ट मंगल

स्वाध्याय

श्रमण महावीर

-आचार्यश्री महाप्रज्ञ

02 March - 08 March 2026

श्रमण महावीर

स्वाध्याय

संबोधि

-आचार्यश्री महाप्रज्ञ

02 March - 08 March 2026

संबोधि
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