हर पल तेरा नाम गाऊं शासन मॉ

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साध्वी विधिप्रभा

हर पल तेरा नाम गाऊं शासन मॉ

हर पल तेरा नाम गाऊं शासन मॉ
जीवन की हर शाम तुझसे ही मॉं।।
मेरे मन मंदिर में, नयनों में है सूरत,
जागूं या निंदिया में, रहती तेरी सूरत।
भेर दुपष्या सन्ध्या, सुख से तेरा स्मरण करूं,
मैं तो इतना ही जानूं तेरे चरणों शीश धरूं।।
हर पल तेरा नाम…।।
तुलसी की कृति थी वो, अनुपम सुंदर कल्याणी,
भिक्षु गण की निधि थी वो, सुनते जब मधुरिम वाणी।
जो भी आया चरणों में, झोली भरकर जाता था,
दोनों हाथ लुटाती, आंनद दर पर आता था।।
हर पल तेरा नाम…।।
ममता की थपकी देकर, सबको जीना सिखलाया,
जन-जन के मन उलझन को, शांत मना सुलझाया।
अंधियारी राहों में, बन दीपशिखा वो जलती,
अनगिन जन श्रद्धा तुम, अज्ञान तिमिर हरती।।
हर पल तेरा नाम…।।
लय- पल पल दिल के पास