वैराग्य भाव से कोई छह काय के जीवों को मारने का त्याग-प्रत्याख्यान करता है, वह अभयदान कहा गया है। वह धर्म-दान का अंग है।

- आचार्य श्री भिक्षु महाराज

स्वाध्याय

श्रमण महावीर

-आचार्यश्री महाप्रज्ञ

04 MAY - 10 MAY 2026

श्रमण महावीर

स्वाध्याय

संबोधि

-आचार्यश्री महाप्रज्ञ

04 MAY - 10 MAY 2026

संबोधि

रचनाएं

श्रद्धा री बाजै झणकार

साध्वी सोमप्रभा, लाडनूँ

04 MAY - 10 MAY 2026

श्रद्धा री बाजै झणकार

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'गण शेखर वन्दना'

मुनि मोहजीत कुमार

04 MAY - 10 MAY 2026

'गण शेखर वन्दना'

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‘देवाधिदेव भी तुम ही हो’

साध्वी अणिमाश्री l डॉ. साध्वी सुधाप्रभा

04 MAY - 10 MAY 2026

‘देवाधिदेव भी तुम ही हो’

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विनम्रता एवं सहजता के प्रतिमान हैं आचार्य महाश्रमण

शासनश्री मुनि विमल कुमार, मुनि उदित कुमार

04 MAY - 10 MAY 2026

विनम्रता एवं सहजता के प्रतिमान हैं आचार्य महाश्रमण
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