'गण शेखर वन्दना'

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मुनि मोहजीत कुमार

'गण शेखर वन्दना'

महाश्रमण शासन श्रृंगार, ऊर्जा के अक्षय भंडार।
गुरु का गौरव गाएँ हम, अन्तर भक्ति सजाएँ हम।।
आत्म रंग में रंगा हुआ अद्भुत व्यक्तित्व तुम्हारा
सकल संघ में सतत बहाओ अतुल क्षीर रस धारा
तुमसे यह शासन गुलजार, महिमा तेरी अपरम्पार।।
संघ-चमन तुझ सा माली पा हंसता-खिलता जाता
आत्मभाव अमृत सिंचन से हर पल पुलकन पाता
भव-भव के उजले हस्ताक्षर, जन जीवन के पुण्य पयोधर।।
करुणा कर्मशीलता सह मैत्री की धार बहाई
नव चिन्तन, नव सृजन योग से नव तरुणाई पाई
गुरुवर पौरुष के प्रतिमान, सबकी आस्था के आस्थान।।
दिव्य दिवाकर हे ज्योतिर्धर आत्म लक्ष्य कल्याणी
भिक्षु, जीत, तुलसी गणिवर की मुखर कर रहे वाणी
गुरुवर महाप्रज्ञ के पट्टधर
जय जय महाश्रमण गण शेखर।।