सव्वमेयं णिराकिच्चा, ते ठिया सुसमाहिए। जो अनुकूल परिषहों को निरस्त कर देते हैं वे समाधि में स्थित हो जाते हैं।

- आचार्य श्री भिक्षु महाराज

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