तेरापंथ का महाकुंभ है मर्यादा महोत्सव

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तेरापंथ का महाकुंभ है मर्यादा महोत्सव

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शासनश्री मुनि विजय कुमार जी के सान्निध्य में भिक्षु साधना केंद्र के प्रवचन हाल में मर्यादा महोत्सव मनाया गया। इस अवसर पर मुनिश्री ने कहा कि उत्सव का लोक जीवन में बड़ा महत्त्व है। वह मनुष्य को नई ताजगी से भर देता है। सुस्त व्यक्ति भी उत्सव का माहौल पाकर चुस्त बन जाता है। दुनिया में उत्सवों की भरमार है, किंतु मर्यादा का महोत्सव सिर्फ तेरापंथ धर्मसंघ में ही मनाया जाता है। आचार्य भिक्षु ने तेरापंथ की प्राण प्रतिष्ठा की, उस समय संघ की चिरंजीविता के लिए मर्यादाओं के पिलर डालकर इसकी नींव को मजबूत किया।
मर्यादा महोत्सव का अर्थ हैµकरणीय कार्य का विधान और अकरणीय का निषेध। उन्होंने अनुभव किया कि मर्यादा के अभाव में स्वच्छंदता और अनुशासनहीनता को पनपने का अवसर मिलेगा। आचार्य भिक्षु ने सबसे पहले मार्गशीर्ष कृष्णा 7 वि0सं0 1832 में मर्यादाओं का शिलान्यास किया, अंतिम मर्यादा लेखन माघ शुक्ल 7 वि0सं0 1859 को किया। धर्मसंघ के चतुर्थ आचार्य श्रीमद् जयाचार्य ने इसी पुण्य तिथि को आधार बनाकर इसे एक महोत्सव के रूप में प्रतिष्ठित कर दिया। प्रथम महोत्सव पूजयप्रवर जयाचार्य की सन्निधि में बालोतरा को मनाने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।
मुनिश्री ने गीत का संगान किया। कन्या मंडल के मंगलाचरण से कार्यक्रम प्रारंभ हुआ। मुनि आत्मानंद जी ने धर्मसंघ के प्रति अपने भावों की प्रस्तुति दी। तेममं द्वारा मर्यादा महोत्सव के संदर्भ में प्रस्तुत परिसंवाद ने श्रोताओं को प्रभावित किया। तेरापंथ सभा के प्रवक्ता प्रदीप सुराणा, मंत्री चमन दुधोड़िया, बिनोद चोरड़िया, विनोद नाहटा, ज्योति, सुमन ने गीत व भाषण के द्वारा अपनी भावाभिव्यक्ति की। कार्यक्रम का संयोजन बहन सरोज ने किया।