नव ही पदारथ जू जूआ, जथातथ सरदें जीव। ते निश्चे समदिष्टी जीवड़ा, त्यां दीधी मुगत री नींव।। - आचार्य श्री भिक्षु
नव ही पदारथ जू जूआ, जथातथ सरदें जीव। ते निश्चे समदिष्टी जीवड़ा, त्यां दीधी मुगत री नींव।।
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