जीव-अजीव की पहचान हुए बिना मन का भ्रम नहीं मिटता। सम्यकत्व आए बिना जीव के आने वाले कर्म नहीं रूकते हैं। - आचार्य श्री भिक्षु
जीव-अजीव की पहचान हुए बिना मन का भ्रम नहीं मिटता। सम्यकत्व आए बिना जीव के आने वाले कर्म नहीं रूकते हैं।
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