व्यक्‍तियों के समूह से समाज का निर्माण होता है, इसलिए समाज व्यक्‍ति से बड़ा होता है। एक व्यक्‍ति के चिंतन की तुलना में समाज अथवा संगठन का चिंतन महत्त्व

- आचार्य श्री भिक्षु महाराज

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