दुष्ट प्रकृति वाले गधे या घोडे़ को खरीद कर वाहक दु:खी बन जाता है। उसी प्रकार अविनीत को दीक्षित कर गुरु पग-पग पर पछताते हैं।

- आचार्य श्री भिक्षु

स्वाध्याय

श्रमण महावीर

-आचार्यश्री महाप्रज्ञ

08 June - 14 June

श्रमण महावीर

स्वाध्याय

संबोधि

-आचार्यश्री महाप्रज्ञ

08 June - 14 June

संबोधि
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