गुरुवाणी/ केन्द्र
सम्यक् ज्ञान और सम्यक् दर्शन है आचार की पृष्ठभूमि : आचार्यश्री महाश्रमण
जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के वर्तमान अधिशास्ता, भगवान महावीर के प्रतिनिधि, महातपस्वी, युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमणजी योगक्षेम वर्ष के संदर्भ में जैन विश्व भारती लाडनूं में प्रवासित हैं। आज के मुख्य प्रवचन कार्यक्रम का शुभारंभ आचार्य प्रवर के मंगल महामंत्रोच्चार के साथ हुआ। साध्वी वृंद द्वारा प्रज्ञा गीत का संगान किया गया। तदुपरान्त आज के निर्धारित विषय “आचार की पृष्ठभूमि” पर आधारित पावन पाथेय प्रदान करते हुए फरमाया कि ‘आचार की पृष्ठभूमि’ आज का विषय है। व्यक्ति सदाचार के पथ पर चलता है, उच्च आचार का पालन करता है। साधुत्व के रूप में भी आचार का पालन हो सकता है, श्रावकत्व के रूप में भी आचार फलित हो सकता है और सामान्य व्यक्ति भी अणुव्रत आचार संहिता आदि को मानकर अथवा अपने ढंग से सदाचार का पालन कर सकता है। यहां प्रश्न है कि आचार की पृष्ठभूमि क्या है? किस भूमिका के आधार पर आचार का पालन हो सकता है?
आगम वाणी से हम एक आधार प्राप्त कर सकते हैं कि चारित्र, सम्यक्त्व विहीन नहीं हो सकता। यदि सम्यक्त्व नहीं है तो सम्यक् आचार और सम्यक् चारित्र हो नहीं सकता। परन्तु चारित्र के बिना सम्यक्त्व स्वतंत्र रूप में हो सकता है। सम्यक्त्व और चारित्र एक साथ भी हो सकते हैं अथवा पहले सम्यक्त्व और बाद में चारित्र हो सकता है। सम्यक् दर्शन, सम्यक् ज्ञान, आचार की पृष्ठभूमि मानी जा सकती है। सामान्य तौर पर देखें तो व्यक्ति का जैसा विचार होता है उसी के अनुरूप ही व्यक्ति का आचार भी बन सकता है। ज्ञान को आचार तक लाने के लिए दर्शन रूपी सेतु की आवश्यकता होती है। पहले व्यक्ति ज्ञान प्राप्त करता है फिर जब सीखे हुए ज्ञान पर आस्था और श्रद्धा होती है तब वह बात आचार में परिणित हो जाती है। दूसरे शब्दों में कहें तो विचार, संस्कार और आचार। पहले विचार होता है जब विचार गहरा हो जाता है तो वह संस्कार बन जाता है वह आचार के रूप में परिणित हो जाता है। अतः सम्यक् ज्ञान और सम्यक् दर्शन को आचार की पृष्ठभूमि के रूप में देखा जा सकता है।
व्यक्ति का व्यवहार प्रामाणिक होना चाहिए। कोई भी बात बतानी हो तो उसका प्रमाण पास में होना चाहिए। बिना पुष्ट जानकारी के कोई भी बात नहीं कहनी चाहिए। वचन में प्रामाणिकता पर सूक्ष्मता से ध्यान देने का प्रयास करना चाहिए कि कोई भी मिथ्या बात मुंह से न निकले। इसलिए व्यक्ति का व्यवहार भी प्रामाणिकता से पूर्ण होना चाहिए। आचार की पृष्ठभूमि में सम्यक् ज्ञान व सम्यक् दर्शन पुष्ट रहे तो आचार भी सम्यक् हो सकता है। मंगल प्रवचन के उपरान्त पूज्य प्रवर ने साधु-साध्वियों को जिज्ञासाएं प्रस्तुत करने का अवसर प्रदान किया और उनका समाधान प्रदान किया।
आचार्य प्रवर की मंगल सन्निधि में आज अखिल भारतीय तेरापंथ महिला मंडल के एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड का सम्मान समारोह आयोजित किया गया। विश्व कैंसर जागरूकता दिवस के अवसर पर अभतममं. ने अपनी 309 शाखाओं के माध्यम से 17200 पैप स्मीयर टेस्ट कराया जो एशिया बुक ऑफ रिकॉर्डस में दर्ज हुआ। इस संदर्भ में तेममं लाडनूं व अभातेममं की अध्यक्ष सुमन नाहटा ने अपनी अभिव्यक्ति दी। एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड के अधिकृत प्रतिनिधि संजय फूला ने भी अपनी भावाभिव्यक्ति दी। उन्होंने इस रिकॉर्ड से संबंधित सर्टिफिकेट व मेडल अभातेममं के पदाधिकारियों को प्रदान किया। आचार्यश्री ने इस संदर्भ ने मंगल आशीर्वाद प्रदान किया।