तेरापंथ-मेरापंथ कार्यशाला का आयोजन

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रिसड़ा।

तेरापंथ-मेरापंथ कार्यशाला का आयोजन

युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमण जी के सुशिष्य मुनिश्री जिनेशकुमार जी ठाणा 3 के सान्निध्य में जैन श्वेताम्बर तेरापंथी महासभा के निर्देशन में तेरापंथ : मेरापंथ कार्यशाला का आयोजन रिसड़ा श्री जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा द्वारा रिसड़ा सेवक संघ के हॉल में आयोजित किया गया। कार्यशाला में प्रशिक्षक उपासक सुशील सामसुखा थे, इस अवसर पर उपस्थित धर्म सभा को संबोधित करे हुए मुनि जिनेश कुमार जी ने कहा- हम चेतन है परन्तु ह‌मारी चेतना पूर्ण विकास की स्थिति में नहीं है। वह अनंता अनंत काल से पूर्वार्जित कर्मो का तथा संस्कारों से आवृत्त है। उन्हें अनावृत्त करना है। आवृत्त से अनावृन्त की ओर सतत गति का नाम ही विश्वास है। विकास भौतिक व आध्यात्मिक दोनों होता है। प्रत्येक व्यक्ति विकास चाहता है। जो व्यक्ति बुरा सोचता है, बुरा करता है उसका अनिष्ट संभव है जो व्यक्ति अच्छा सोचता है अच्छा बोलता है और अच्छी सत प्रवृति करता है उसका - का इष्ट संभव है। व्यति ईर्ष्या से मुक्त बने, अच्छा सोचे। मुनि ने आगे कहा विकास का दू‌सरा सूत्र है. वचन की मधुरता। जो व्यक्ति मधुर बोलता है असंभव लगने वाला कार्य भी संभव हो जाता है।। व्यक्ति मधुर बोले। मधुर बोलने वाला सबका प्रिय हो जाता है। आचार्य भिक्षु का मन भी पार्वत्र था और वचन भी प्रिय थे। उनके अनुशासन में भी हित था। विकास का तीसरा सूत्र है विचारों में शालीनता। विचार हमेशा पवित्र हो, सकारात्मक हो विचारों में संकीर्णता न हो। आचार्य भिक्षु के विचारों में अनाग्रह भाव था। विकास का चौथा तथ्य है आचारकी निर्मलता। आचरण सम्यग होना चाहिए। तेरापंथ मेरापंथ कार्यशाला सब के लिए कल्याणकारी हो। मुनिश्री परमानंद जी ने कहा मानवता के चार आधार स्तंभ है। प्रेम, न्याय, विश्वास, श्राम। मुनि कुणाल कुमार जी ने सुमधुर गीत का संगान किया। स्वागत भाषण रिसड़ा श्री जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा के अध्यक्ष प्रदीप मुणोत ने दिया। कार्यशाला के प्रशिक्षक उपासक सुशील बाफना ने कार्यशाला के संदर्भ में अपने विचार व्यक्त किये। अणुव्रत समिति, कोलकाता के अध्यक्ष नवी दुगड़ व सदस्यों ने ईको फ्रेंडली होली का बैनर अनावरण करते हुए ईको फ्रेंडली होली की जानकारी प्रदान की। आभार ज्ञापन सभा के मंत्री प्रकाश भंसाली ने किया। कार्यक्रम का संचालन मुनि परमानंद ने किया।