शासनमाता तेरी,  गौरव गाथा गाते है

रचनाएं

साध्वी रौनकप्रभा

शासनमाता तेरी, गौरव गाथा गाते है

शासनमाता तेरी, गौरव गाथा गाते है
बगिया सीची करुणा से, यादों मे खो जाते है।
नारी जाति की शक्ति, मीरा सी अद्‌भूत भक्ति
भैक्षवगण अनुरक्ति, तेरी जिन्दगी विरक्ति
ममतामयी माँ को, सविनय शीश झुकाते है।
गणहित समर्पित कण कण, सेवाएं दी अनमोल
आश्वस्त हृदय हो जाते, सुन तेरे मधुरिम बोल
कार्यकुशलता अद्‌भुत थी, प्रेरणा हम पाते है।
तेरा रूप जब भी निहारु, थकती न मेरी नयना
स्वर कानों में है गुंजे. अब दर्श तुम दे दो ना
तेरे नाम स्मरण से, ऊर्जा हम पाते है।
लयः तेरे जैसा यार...