अणुव्रत स्थापना दिवस, कालूगणी जन्म दिवस, योगक्षेम वर्ष मंगलकामना कार्यकम का आयोजन

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रिसडा।

अणुव्रत स्थापना दिवस, कालूगणी जन्म दिवस, योगक्षेम वर्ष मंगलकामना कार्यकम का आयोजन

आचार्य श्री महाश्रमण जी के सुशिष्य मुनिश्री जिनेश कुमारजी ठाणा 3 के सानिध्य में आचार्य श्री कालूगणी जन्मदिवस, अणुव्रत स्थापना दिवस व योगक्षेम वर्ष शुभारंभ का मंगलकामना कार्यक्रम तेरापंथ सभा भवन में हुआ। इस अवसर पर मुनि जिनेश कुमारजी ने कहा-आचार्यश्री कालूगणी तेरापंथ धर्म संघ के अष्टम् अधिशास्ता थे। वे निस्पृह साधक निर्विकारी आचार संपन्न महापुरुष थे। उन्होंने अनेक क्षेत्रों का विस्तार किया और स्वयं ने भी यात्रा करके मानवता व जिनशासन की अद्‌भुत सेवा की। उनमें समझाने की अद्‌भुत कला थी। उनके शासनकाल में सैकड़‌ों साधु साध्वी की दीक्षा हुई, उनमें मुनि तुलसी, मुनि नथमलजी धर्मसंघ के क्रमशः नवम्‌ व दशम् अधिशासता हुए। उनका व्यक्तित्व बेदाग व चारित्र उज्वल था। मुनिजी ने आगे कहा आचार्य तुलसी मानवता के मसीहा थे। उन्होंने नैतिक मूल्यों के संरक्षण व चारित्रिक उन्नयन के लिए अणुव्रत आन्दोलन का सूत्रपात किया। अणुव्रत असाम्प्रदायिक आन्दोलन है। आज के विषाक्त वातावरण के लिए अणुव्रत सुरक्षा कवच है। अणुव्रत केवल आचार संहिता ही नहीं अपितु यह जीवन का दर्शन है। धर्म और व्यवहार का सेतु है। अणुव्रत का अर्थ है छोटे नियम । जीवन शुद्धि की न्यूनतम आचार संहिता अणुव्रत है। इसकी साधना हर कोई सम्प्रदाय का अनुयायी कर सकता है । विश्व को अणुबम नहीं अणुव्रत की आवश्यकता है। सभी साधु नही बन सकते, लेकिन अणुव्रतों के नियमों की साधना करके जीवन को, परिवार को समाज को शक्तिशाली बना सकते है। पर्यावरण को सुरक्षित रख सकते हैं । मुनिजी ने योगक्षेम वर्ष की शुभारंभ पर कहा- मैं कुछ होना चाहता हूं कि भावना चारों ओर दिखाई देती है। इसी भावना का प्रतिनिधित्व करता हुआ यह वर्ष योगक्षेम वर्ष के रूप में साध्वी प्रमुखा कनकप्रभा जी के निवेदन पर लाडनूं में आचार्य प्रवर के सानिध्य सैकड़ों साधु साध्वियां, समणीयां, मुमुक्षु व श्रावक समाज की उपस्थिति में मनाया जा रहा है। योग का अर्थ है- अप्राप्त से प्राप्त करना व क्षेम का अर्थ जो प्राप्त है उसका संरक्षण करना। योगक्षेम में विशेष रूप से प्रशिक्षण दिया जायेगा। उपासक जुगराज बैद, तेरापंथ सभा अध्यक्ष प्रदीप मणोत, तेरापंथ महिला मंडल की अध्यक्षा सुनीता सुराणा राजेन्द्र चौपड़ा, उपासक पवन दुगड़‌ ने शुभकामनाएं प्रेषित करते हुए विचार रखे। कार्यक्रम का संचालन मुनिश्री परमानंदजी ने किया।