श्रद्धा, समर्पण और विवेक संपन्न बनें

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श्रद्धा, समर्पण और विवेक संपन्न बनें

नोखा।
मर्यादा, अनुशासन, विनय, विवेक श्रावकों के लिए भी आवश्यक है। अहंकार और ममकार से व्यक्ति का पतन होता है। तेरापंथ संघ व संघपति के प्रति श्रद्धा, समर्पण, आस्था, निष्ठा आवश्यक है। श्रावक बादरमल भंडारी का प्रेरक प्रसंग सुनाते हुए डॉ0 साध्वी चरितार्थप्रभा जी ने यह उद्गार व्यक्त किए। तेरापंथ कन्या मंडल ने ‘तेरापंथ का आधार मर्यादा’ गीत का संगान किया। साध्वी कृतार्थप्रभा जी एवं साध्वी विधिप्रभा जी ने श्रावक के दायित्व पर विचार व्यक्त करते हुए कहा कि श्रावक के लिए गंभीर, धीर और विवेक संपन्न होना आवश्यक है। महिला मंडल एवं कन्या मंडल द्वारा तेरापंथ की जीवन झाँकी प्रस्तुत की। प्रीति मरोठी ने विचार व्यक्त किए। सभा अध्यक्ष इंदरचंद बैद ‘कवि’ ने आगामी कार्यक्रम की जानकारी दी।