थली संभाग स्तरीय आंचलिक कार्यशाला का आयोजन

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थली संभाग स्तरीय आंचलिक कार्यशाला का आयोजन

लाडनूं।
शासन गौरव साध्वी कल्पलता जी द्वारा नमस्कार महामंत्र से थली संभाग स्तरीय आंचलिक कार्यशाला का शुभारंभ हुआ। साध्वीप्रमुखाश्री विश्रुतविभा जी के संदेश का वाचन शोभा दुगड़ द्वारा किया गया। लाडनूं से एडीजे उत्तमा माथुर एवं अभातेममं अध्यक्ष, महामंत्री व उनकी टीम ने ‘मेरा परिवार मेरी जिम्मेदारी’ पोस्टर का विमोचन किया। राष्ट्रीय अध्यक्ष सरिता डागा ने कहा कि बड़ों को अपना दिल बड़ा रखना पड़ता है तभी जुड़ाव बना रहता है। स्थानीय मंडल द्वारा विषय प्रस्तुति दी गई। मुख्य वक्ता राष्ट्रीय ट्रस्टी सूरज बरड़िया ने बताया कि गुरुदेव तुलसी ने हमें आजाद किया रुढ़ियों से, न की हमें आजाद किया जिम्मेदारी से। परिवार में अभिभावकों को सम्मान दें, बच्चों को संस्कार दें, बहुओं को अवसर दें।
शासन गौरव साध्वी कल्पलता जी ने कहा कि पूर्व से पश्चिम, उत्तर से दक्षिण, देख लिया जग सारा, सबसे प्यारा घर है हमारा। हमें हमारी परंपराओं और संस्कारों को जीवंत रखना चाहिए। सेवा केंद्र व्यवस्थापिका साध्वी लक्ष्यप्रभा जी ने विचार व्यक्त किए। मुख्य अतिथि महामंत्री नीतू ओस्तवाल ने समझाया कि शब्दों को कंट्रोल करके हम कैसे परिवार में प्रेम व सौहार्द बना सकते हैं। लाडनंू महिला मंडल ने नाटक के द्वारा रोचक प्रस्तुति दी। राष्ट्रीय ट्रस्टी कल्पना बैद ने अपने विचार व्यक्त किए। मेरा परिवार मेरी जिम्मेदारी पर संकल्प पत्र का वाचन क्षेत्रीय प्रभारी अलका बैद द्वारा किया गया। राष्ट्रीय कन्या मंडल प्रभारी अदिति सेखानी ने महाश्रमण अष्टकम वीडियो का लॉन्च राष्ट्रीय अध्यक्ष व महामंत्री द्वारा करवाया। प्रथम चरण का संयोजन श्वेता खटेड़ ने किया। मंगलपाठ के द्वारा प्रथम चरण संपन्न हुआ।
कार्यशाला के द्वितीय चरण का शुभारंभ मंगलाचरण द्वारा कन्या मंडल ने किया। समणी डॉ0 कुसुमप्रज्ञा जी ने मंत्र एवं प्रयोग द्वारा समझाया कि परिवार में समस्याओं का समाधान कैसे कर सकते हैं। पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष पुष्पा बैद व राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य प्रीति घोषल ने भाव व्यक्त किए। 11 क्षेत्र से आई बहनों ने अपनी प्रस्तुति दी। आभार ज्ञापन गीतिका के माध्यम से रेनू कोचर एवं उपमंत्री राजश्री भुतोड़िया ने किया। द्वितीय चरण का संचालन मंत्री राज कोचर ने किया। कन्या मंडल एवं महिला मंडल का श्रम मुखरित रहा। थली के सरदारशहर, चूरू, रतनगढ़, राजलदेसर, पड़िहारा, छापर, सुजानगढ़, बीदासर, छोटी खाटू, डीडवाना व चाडवास की लगभग 11 शाखा मंडलों की सदस्याएँ उपस्थित रहीं।