आचार्यश्री महाप्रज्ञजी के 17वें महाप्रयाण दिवस पर विविध कार्यक्रम

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गंगाशहर

आचार्यश्री महाप्रज्ञजी के 17वें महाप्रयाण दिवस पर विविध कार्यक्रम

आचार्य श्री महाश्रमणजी के आज्ञानुवर्ती मुनि अमृत कुमार जी के सान्निध्य में आचार्य श्री महाप्रज्ञ जी के 17वें महाप्रयाण दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में मुनि अमृत कुमार जी ने अपने उद्बोधन में कहा कि गंगाशहर की पावन धरा पर बालक नथमल का भाग्योदय हुआ। पहली बार अपनी मातुश्री के साथ तेरापंथ के अष्टमाचार्य श्री कालुगणी के दर्शन करने गंगाशहर आया जहां मुनिश्री तुलसी (गुरुदेव श्री तुलसी) का भी दर्शन किया। आपने मात्र दस वर्ष की अल्प अवस्था में मातुश्री बालु जी के साथ पुज्यपाद कालुराम जी के कर कमलों से संयम रत्न को प्राप्त कर आठ दसकों तक संयम की सफल साधना की।आपने शिक्षा गुरु श्री तुलसी की पाठशाला में अल्पज्ञ से महाप्रज्ञ की यात्रा तय कर 21 सदी के महान् दार्शनिक कहलायें। आगे आपने कहा कि महाप्रज्ञ जी ने अनेकानेक अवदानों से मानव को उपकृत किया।
मुनि बीमलबिहारी ने अपने विचारों को व्यक्त किया। जैन श्री लुणकरण छाजेड़ ने तुलसी महाप्रज्ञ को एक बताते हुए कहा कि आपने जीवन की अद्भुत कसौटी पर खरे उतरते हुए गंगाशहर की तपोभूमि पर अपने उत्तराधिकारी का चयन किया। तेरापंथ प्रोफेशनल से पूर्व महापौर नारायण चौपड़ा, युवक परिषद से रोहित बेद, महिला मण्डल से रुचि छाजेड़, आचार्य तुलसी शांति प्रतिष्ठान से धर्मेन्द्र डाकलिया, अणुव्रत समिति से मनोज छाजेड़ और चैनरुप छाजेड़ आदि व्यक्ताओं ने श्रृद्धासुमन अर्पित किए। सफल संयोजन करते हुए मुनि उपशम कुमार जी ने कहा कि आचार्य श्री महाप्रज्ञ जी ध्यान और स्वाध्याय के महान साधक थे।