गुण गाऊँ मैं, गाऊँ मैं,  गुण गाऊँ मैं,

रचनाएं

साध्वी रौनक प्रभा

गुण गाऊँ मैं, गाऊँ मैं, गुण गाऊँ मैं,

गुण गाऊँ मैं, गाऊँ मैं, गुण गाऊँ मैं,
साध्वी प्रमुखा चयन दिन आज बधाऊँ मैं।
अभिनंदन श्रम की तस्वीर का, अभिनंदन संयम के समीर का
ओजस्वी अहिंसा की बलिहारी जाऊँ मैं।
प्रवचन शैली तेरी निराली है,
बातों बातों में पिलाते अमृत प्याली है
पारस प्रज्ञा देख तेरी हरसाऊँ मैं।
समता, ममता की मूरत हो, क्षमता, गंभीरता की सूरत हो।
आत्मस्थ, स्वस्थ, मस्त रहो यही चाहूँ मैं।
चंदेरी की चांदनी बधाए, शुभ भावों की मंगल भावना सजाए
आनंद उमंग की वेला आई गुनगुनाऊँ मैं
श्रद्धा समर्पण तेरे जैसा मुझमें चाहूँ मैं।
शासना लम्बी तेरी अरसों पाऊँ मैं।
लय : राम आएंगे