अपराधी कैदियों के लिए प्रेक्षा ध्यान और योग सत्र पुनः आरम्भ

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नई दिल्ली।

अपराधी कैदियों के लिए प्रेक्षा ध्यान और योग सत्र पुनः आरम्भ

छतरपुर स्थित अध्यात्म साधना केंद्र ने तिहाड़ जेल, दिल्ली में नाबालिग और नए युवा अपराधियों के मानसिक स्वास्थ्य, तनाव और व्यवहार पर प्रेक्षा ध्यान और योग के प्रभाव का 359 दिन (लगभग एक वर्ष) का विस्तृत अध्ययन शुरू किया। यह पहल कैदियों में मानसिक संतुलन, भावनात्मक लचीलापन और सकारात्मक व्यवहार परिवर्तन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से की गई थी। इस कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञ प्रशिक्षक नियमित रूप से कैदियों से संपर्क में रहते हुए योग, प्राणायाम और प्रेक्षा ध्यान के सम्मिलित सत्र संचालित करते रहे। साथ ही, कैदियों पर नियमित अंतराल पर मनोवैज्ञानिक परीक्षण किए गए, ताकि उनके मानसिक स्थिति, तनाव स्तर और भावनात्मक लचीलापन का व्यवस्थित मूल्यांकन किया जा सके।
800 से भी अधिक कैदियों पर की गई शोध के परिणाम अत्यंत उत्साहवर्धक रहे और आंकड़े शोधकर्ताओं की प्रारंभिक अपेक्षाओं से भी अधिक सकारात्मक पाए गए। अध्ययन ने स्पष्ट किया कि प्रेक्षा ध्यान और योग का सम्मिलित अभ्यास कैदियों की चिंता, तनाव और आक्रामक प्रवृत्तियों को कम करने में मदद करता है, साथ ही उनके मानसिक संतुलन और आत्म-जागरूकता को भी बढ़ाता है। प्रेक्षा ध्यान, जैन परंपरा पर आधारित एक प्राचीन ध्यान तकनीक, मानसिक स्पष्टता, आत्मनिरीक्षण और भावनात्मक संतुलन विकसित करने में सहायक है। इस पद्धति में कैदी अपने शरीर, श्वास और भावनाओं का सूक्ष्म निरीक्षण करते हैं, जिससे तनाव कम होता है और आत्म-जागरूकता बढ़ती है। केंद्र के प्रशिक्षक दैनिक 90 मिनट के सत्रों में योग, प्राणायाम और प्रेक्षा ध्यान का संयोजन करते हैं।