रचनाएं
युग प्रधान आचार्यप्रवर चरणों में है शत्-शत् वंदन
युग प्रधान आचार्यप्रवर चरणों में है शत्-शत् वंदन,
शब्द नहीं भावों की भक्ति स्वीकार करो नेमानंदन।।
कलयुग में सतयुग सा शासन मोक्षवगन का नज़ारा है,
महावीर सा महातपस्वी महाश्रमण रखवारा है॥
सरदारशहर में जन्म लिया, शिक्षा भूमि सरदारशहर।
सरदारशहर संयम पाया, सरताज बने सरदारशहर।।
धन्य हुआ सरदारशहर, इतिहास रचा मनहारा है॥ कलयुग...।।
अदभुत तेरा यह शासन है, अनुपम तेरा अनुशासन है
निस्पृह योगी अलबेले, शोभे ग्यारहवां आसन है,
तेरापंथ के गगनांगण में, चमकें ज्यों ध्रुवतारा है॥ कलयुग…...
नहिं देखा महावीर प्रभु को, नहीं सामने सीमन्धर
करुणा के महासागर इस युग के तुम ही तो तीर्थंकर
तीर्थंकर के प्रतिनिधि तेरा हमको सबल सहारा है। कलयुग…...
युगों-युगों तक राज करो तुम मिले शासना वशायी,
नयनों में आकर्षण ऐसा नतमस्तक है सब अनुयायी
महाप्रन के पट्टधर में तुलसी का रूप निहारा है॥ कलयुग…
तर्ज़ : धूप समय की लाख सताएं