संस्थाएं
आचार्यश्री महाप्रज्ञजी के 17वें महाप्रयाण दिवस पर विविध कार्यक्रम
परम पूज्य युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमणजी की सुशिष्या साध्वी श्री पुण्य जी के सन्निधि में आचार्य श्री महाप्रज्ञजी का 17 वा महाप्रयाण दिवस का आयोजन हासन में किया गया .कार्यक्रम का प्रारम्भ साध्वी श्री के द्वारा नमस्कार महामंत्र द्वारा किया गया. साध्वी श्री ने मंगल उद्बोधन में कहा किआचार्य महाप्रज्ञ एक क्रान्तिकारी, युगदृष्टा, असाधारण, विलक्षण आचार्य थे. तेरापंथ धर्मसंघ के विलक्षण आचार्य क्यों थे? क्योंकि वह अपने गुरु के हाथों से गुरु सन्निधि में आचार्य बने. आपके अवदान क्रान्तिकारी थे प्रेक्षाध्यान, जीवन विज्ञान आदि. यह अवदान समूचे विश्व को आलोकित करने वाले हैं. असाधारण व्यक्तित्व इसलिए था जब वह ढाई मास के हुए तब उनके पिता का स्वर्गवास हो गया. आचार्य श्री कई बार फरमाया करते थे वह सीन आज भी मेरी आंखों के सामने है. आपने अपने जीवन में 'भिक्षु म्हारे प' आदि गीत कभी याद नहीं किए जब आप छोटे थे आपकी माता श्री आपकी लोरी में एक गीत सुनाती जिससे यह गीत आपको याद हो गये। आचार्य श्री महाप्रज्ञ जी का जीवन कीर्तिमानों का कीर्तिमान था। साध्वी बोधिप्रभाजी ने अपने भावों की प्रस्तुति दी। साध्वी वर्धमान यशजी ने सुमधुर गीत का संगान किया. मंगलाचरण युवति मंडल के द्वारा किया गया। महिला मंडल की अध्यक्षा विनीता तातेड़ ने आचार्य श्री महाप्रज्ञ के जीवन पर प्रकाश डाला उसके तत्पश्चात महिला मंडल के साथ गीतिका प्रस्तुत की. तेरापंथ युवक परिषद के अध्यक्ष नितेश सुराणा के साथ युवक परिषद ने भी गीतिका प्रस्तुत की. मल्लाड सभा के अध्यक्ष महावीर भंसाली, तेरापंथ सभा के अध्यक्ष सोहनलाल तातेड़, एवं साध्वी बोधिप्रभा जी के संसार पक्षीय बढ़ियासा कान्तादेवी गोलछा ने अपने भावों की प्रस्तुति दी।