क्रोध और अहंकार है पतन के द्वार, इनसे बचें : आचार्यश्री महाश्रमण

गुरुवाणी/ केन्द्र

लाडनूं। 27 अप्रैल, 2026

क्रोध और अहंकार है पतन के द्वार, इनसे बचें : आचार्यश्री महाश्रमण

जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के एकादशमाधिशास्ता, चतुर्विध धर्मसंघ के शास्ता आचार्य श्री महाश्रमण जी ने आज 'कषाय से क्यों बचें' विषय पर मर्मस्पर्शी प्रतिबोध प्रदान किया। आचार्य प्रवर ने स्पष्ट किया कि आत्मा की संसारी अवस्था को बनाए रखने और कर्मों के गहराने में कषायों की मुख्य भूमिका होती है।
कर्म बंध के लिए उत्तरदायी है सकषायी अवस्था : आचार्य श्री ने तात्त्विक चर्चा करते हुए फरमाया कि कर्मों के आगमन का द्वार ही 'कषाय' है। पूज्य प्रवर ने फरमाया कि केवल योग (प्रवृत्ति) से होने वाला बंध नाम मात्र का होता है, किंतु जब योग के साथ कषाय जुड़ जाते हैं, तो कर्मों का बंध अत्यंत गहरा और लंबी अवधि वाला होता है। पूज्य प्रवर ने क्रोध, मान, माया और लोभ—इन चारों कषायों से बचने की प्रेरणा देते हुए उनके दुष्प्रभावों पर प्रकाश डाला।
आचार्य श्री द्वारा प्रदत्त विजय के सूत्र:
१. क्रोध से अधोगति: क्रोध जीव को नीचे की ओर ले जाता है।
क्रोध और अहंकार है...
आवेश में आना कमजोरी है; शांत रहकर अपनी बात कहना ही सच्ची साधना है।
२.अहंकार का त्याग:
मान पतन का कारण है। विनम्रता, सादगी और व्यवहार में मधुरता अपनाकर ही अहंकार से मुक्ति
संभव है।
३.लोभ का भय: लोभी व्यक्ति इस लोक और परलोक दोनों जगह भय से घिरा रहता है।
आचार्य श्री ने सार रूप में फरमाया कि कषाय आत्मा के पतन का आधार हैं, अतः साधक को इनसे निरंतर बचने का पुरुषार्थ करना चाहिए।
श्रद्धा और अभिव्यक्ति का संगम:
कार्यक्रम का शुभारंभ आचार्य श्री के मंगल महामंत्रोच्चार और साध्वी वृंद के 'प्रज्ञा गीत' से हुआ। दो दिवसीय विशेष कार्यक्रम के समापन अवसर पर साधु-साध्वियों के वर्धापना का क्रम जारी रहा।
अभिव्यक्ति एवं वर्धापना: साध्वी लब्धि श्री जी, साध्वी संघ प्रभा जी, साध्वी गुप्ति प्रभा जी, समणी निर्मल प्रज्ञा जी, मुनि सुमति कुमार जी, साध्वी पंकज श्री जी, साध्वी रचना श्री जी, साध्वी काव्यलता जी, समणी चैतन्य प्रज्ञा जी, मुनि अर्हत् कुमार जी, साध्वी गवेषणा श्री जी, साध्वी हिम श्री जी, समणी मंजू प्रज्ञा जी, मुनि जेबू कुमार जी (सरदारशहर), साध्वी शुभ्रयशा जी, साध्वी मंगल यशा जी, साध्वी शुभ प्रभा जी, मुनि पारस कुमार जी, साध्वी कार्तिक यशा जी, साध्वी ऋद्धिप्रभा जी, मुनि पृथ्वीराज जी, मुनि श्रेयांस कुमार जी, साध्वी मंदार प्रभा जी, साध्वी शताब्दी प्रभा जी और साध्वी विज्ञ प्रभा जी।
गीत संगान: साध्वी रति प्रभा जी एवं साथी साध्वियों ने, तथा साध्वी शांतिलता जी, साध्वी पूनम प्रभा जी और साध्वी श्रेष्ठ प्रभा जी ने सुमधुर गीतों की प्रस्तुति दी।
अखिल भारतीय तेरापंथ महिला मंडल की राष्ट्रीय अध्यक्ष सुमन नाहटा ने भी इस अवसर पर अपने विचार व्यक्त किए।
अंत में आचार्य श्री ने उपस्थित श्रावक समाज को अपनी पावन देशना से लाभान्वित किया।