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विनय और वात्सल्य के महासुमेरू हैं- आचार्य महाश्रमण
अहमदाबाद पश्चिम तेरापंथभवन में स्थानीय तेरापंथ सभा द्वारा आयोजित आचार्य महाश्रमण जी के 65वें जन्मोत्सव एवं 17वें पट्टारोहण दिवस के अवसर पर अपने श्रद्धोद्गार में साध्वी अणिमाश्री जी ने कहा - आचार्य महाश्रमण का जीवन अनेक गुणों का समवाय है। विनय और वात्सल्य भाव की पराकाष्ठा अद्भुत है। इन दो विशिष्ट गुणों ने उनको सरसज्ज बना दिया। चतुर्विध संघ विकास में उनका महनीय, विशाल उदार और प्रम्बल चिन्तन अनुप्रेय है। परम सौभागी महामना व्यक्तित्व ने आचार्य तुलसी और महाप्रज्ञ जी का साक्षात् सान्निध्य प्राप्त किया। जिनशासन और धर्मसंघ की सेवा मात्र नहीं, मानव जाति की सेवा भी उनके जीवन का परम ध्येय है। उनमें आज्ञा निष्ठा, संघ निष्ठा, अनुशासन निष्ठा और आत्म निष्ठा की साधना बेजोड़ है। आज आवश्यकता है घर, परिवार, समाज के सदस्यों के दिलों में इन गुणों का अवतरण हो, जिससे शांति की ,सौहार्द और प्रेम की लौ जलती रहे। छोटी-छोटी खामियों को फ़ैलाने के बजाय नज़रअंदाज़ करते चलें। प्रमोदभावना की सुवास से खुद को भावित करने का पवित्र संकल्प ग्रहण करें और आचार्य महाश्रमण के जैसे सहस्त्र गुणधारी व्यक्तित्व के सच्चे अनुगामी बनें। प्रोफेसर डॉ साध्वी मंगल प्रज्ञा जी ने कहा — अतीत की विशिष्ट पुण्याई ने मोहन को आचार्य महाश्रमण बना दिया। ऐसे पुण्य के पुरोधा इतिहास बनाते नहीं, इनके कर्तृत्व से स्वयं इतिहास बन जाता है। वैशाख का अक्षय महीना उनके जन्म, दीक्षा और पदारोहण के साथ जुड़ा, यह भी प्रबल पुण्याई का द्योतक है। आचार्य तुलसी और आचार्य महाप्रज्ञ का अतिशायी विश्वास को प्राप्त कर पायदान पर चढ़ते रहे और आज जिनशासन के ख्यातनाम आचार्य के रूप में प्रसिद्धि हासिल कर ली। हर दिल में बस गए। विशिष्ट प्रेरणा प्रदायक अवसर पर पारस्परिक विश्वास, संवर्धक प्रयोग का संकल्प स्वीकार करने की साध्वी जी ने प्रेरणा प्रदान की। अपने अनुभवों की साझा करते हुए साध्वी मंगलप्रज्ञा जी ने कहा — मुझे वर्षों तक आचार्यवर की नेकट्य उपासना, शिक्षा ग्रहण आदि का योग मिला, यह मेरा परम सौभाग्य है।
तेरापंथ महिला मंडल पश्चिम ने श्रद्धासिक्त समूह संगान किया। अखिल भारतीय तेरापंथ युवक परिषद के निवर्तमान अध्यक्ष एवं जयपुर तेरापंथ सभा के वर्तमान उपाध्यक्ष सुरेन्द्र सेठिया ने आराध्य की अभ्यार्थना की। महिला मंडल अध्यक्षा सुशीला खतंग व श्रावक लुणकरण सांड, राजेन्द्र बोथरा ने हृदयोद्गार प्रस्तुत किए। साध्वी समत्वयशा जी ने सौम्य मधुर संगान प्रस्तुत किया। साध्वी कर्णिका जी, साध्वी सुदर्शना प्रभाजी ने गुरु गुणोत्कीर्तन में अपूर्व विचारों की अभिव्यक्ति दी। एवं साध्वी मैत्री प्रभा जी ने कार्यक्रम का कुशलतापूर्वक संचालन किया। संघ संगान के साथ कार्यक्रम सम्पन्न हुआ।