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आचार्यश्री महाप्रज्ञजी के 17वें महाप्रयाण दिवस पर विविध कार्यक्रम
श्री जैन श्वेतांबर तेरापंथी सभा के तत्वावधान में स्थानीय तेरापंथ भवन में तेरापंथ के दशम अनुशास्ता आचार्य श्री महाप्रज्ञ जी की 17वी पुण्यतिथि के अवसर पर श्रद्धा सुमन अर्पित किए गए। इस समारोह में कार्यक्रम का शुभारंभ ओमश्री महाप्रज्ञ गुरवे नमः जप अनुष्ठान से किया गया। इसके पश्चात सामूहिक रूप से आचार्य श्री महाप्रज्ञ जी की अनुपम रचना 'चैत्य पुरुष जग जाये' का सामूहिक संगान किया गया। इसके पश्चात डॉक्टर गोपी ने आचार्य महाप्रज्ञ को विश्व के सबसे बड़े तथ महान संत की उपमा से उपमित कर उनका गुणगान व स्तवन किया। सुनीता जैन ने भावपूर्ण गीतिका के माध्यम से अपने उद्गार व्यक्त किये। सभा मंत्री सुभाष जैन ने कहा कि आचार्य महाप्रज्ञ जी 20वी शताब्दी के उत्तरार्द्ध के महासूर्य थे । उन्होंने तेरापंथ धर्म संघ ही नहीं अपितु सम्पूर्ण मानवता के कल्याण के लिए अतुल्यनीय एवं अनुपम कार्य किया। उन्होंने 2002 के गुजरात दंगों को शांत कराने में जो महत्वपूर्ण भूमिका निभाई वह उनके मानवतावादी तथा अहिंसा परमो धर्म दृष्टिकोण का अनुपम उदाहरण है।