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विनम्रता एवं सहजता के प्रतिमान हैं आचार्य महाश्रमण
आचार्य श्री महाश्रमण के जन्मोत्सव, पट्टोत्सव एवं दीक्षा दिवस के उपलक्ष्य में भव्य आयोजन तेरापंथ भवन परिसर के महाप्रज्ञ सभागार में किया गया। शासनश्री मुनि विमल कुमार जी एवं बहुश्रुत मुनि उदित कुमार जी के सान्निध्य में आचार्य महाश्रमण अभिवंदना समारोह अध्यात्म साधना केंद्र परिसर के महाप्रज्ञ सभागार में 26 अप्रैल को आयोजित हुआ। मुनि उदित कुमार जी ने अपने उद्बोधन में कहा— आचार्य महाश्रमण जी का व्यक्तित्व अगाध विनम्रता और अद्भुत सहजता का वह धरातल है, जहाँ अहंकार का पूर्ण विसर्जन हो जाता है। एक महान आचार्य के रूप में उनकी सौम्यता यह सिद्ध करती है कि शिखर पर पहुँचकर भी जड़ों से जुड़े रहना ही वास्तविक महानता है। उनका सहज स्वरूप और वात्सल्यमयी दृष्टि प्रत्येक जिज्ञासु के अंतर्मन को शीतलता प्रदान करती है। वे केवल पथ-प्रदर्शक नहीं, अपितु मानवीय संवेदनाओं और सरल जीवन पद्धति के जीवंत प्रतिमान हैं। शासनश्री मुनि विमल कुमार जी ने अपने संक्षिप्त विचारों में कहा कि आचार्य महाश्रमण जी का जीवन अनुशासन, संयम और करुणा का अनुपम समन्वय है। उनका मार्गदर्शन व्यक्ति को आत्मविकास की दिशा में प्रेरित करता है और समाज में नैतिक मूल्यों के सुदृढ़ीकरण का आधार बनता है। मुनि मधुर कुमार जी, मुनि अक्षय कुमार जी, मुनि धन्य कुमार जी ने भी अपने प्रासंगिक विचार रखें। कार्यक्रम का प्रारंभ दक्षिण दिल्ली महिला मंडल के मंगलाचरण (संगान) से हुआ। पूर्वी दिल्ली महिला मंडल ने भी भक्तिमय गीत की प्रस्तुति दी। इस अवसर पर आचार्य महाश्रमण प्रवास व्यवस्था समिति के अध्यक्ष कन्हैया लाल पटावरी, तेरापंथ सभा दिल्ली के अध्यक्ष सुखराज सेठिया, दक्षिण दिल्ली सभा के अध्यक्ष सुशील पटावरी, दक्षिण दिल्ली महिला मंडल से सरोज भूतोडिया एवं अणुव्रत समिति दिल्ली से बाबूलाल गोलछा, कल्पना ने वक्तव्य व कविता के माध्यम से अपनी भावाभिव्यक्ति दी। आभार ज्ञापन तेरापंथ भवन व्यवस्थापक संदीप डूंगरवाल व संचालन सभा के महामंत्री प्रमोद घोड़ावत ने किया।