तेरापंथ दर्शन संबोध कार्यशाला का आयोजन

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तेरापंथ दर्शन संबोध कार्यशाला का आयोजन

युग प्रधान, महातपस्वी आचार्य श्री महाश्रमण जी की सुशिष्या साध्वी पुण्ययशाजी के सानिध्य में टी.पी.एफ. के तत्वावधान में चार दिवसीय कार्यशाला का शुभारंभ किया गया. साध्वी श्री जी द्वारा नवकार मंत्र की ध्वनि से कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया. टी. पी. एफ. की बहनों द्वारा मंगलाचरण प्रस्तुत किया गया. साध्वी बोधि प्रभाजी ने कहा- आचार्य भिक्षु तेरापंथ के महान प्रणेता थे. उनका जन्म आषाढ़ शुक्ला त्रयोदशी को हुआ जिसे सर्व सिद्धा त्रयोदशी भी कहा जाता है. तद्नुसार उन्हें अपने चरम लक्ष्य की प्राप्ति में पूर्व सफलता मिली. अतः उनका सर्व सिद्धा त्रयोदशी के दिन जन्म होना उनके सफल भावी जीवन का संकेत था. उनकी वैराग्य साधना अद्भुत थी. उनकी अंतर्दृष्टि जाग्रत थी। साध्वी पुण्ययशाजी ने अपने मंगल उद्बोधन में कहा- यह भिक्षु द्विशताब्दी वर्ष चल रहा है. इसमें तेरापंथ दर्शन संबोध कार्यशाला का आयोजन तेरापंथ व आचार्य भिक्षु को समझने का एक महनीय उपक्रम है. तेरापंथ और भिक्षु एक दूसरे के पर्याय हैं. आचार्य भिक्षु निर्भीक संत थे. क्रांतिकारी महापुरुष थे। इस अवसर पर तेरापंथ सभा अध्यक्ष सोहनलाल तातेड़, टी. पी. एफ. के नितेश सुराणा महिला मंडल अध्यक्षा विनीता सुराणा टी. पी. एफ. के अध्यक्ष प्रकाश भंसाली की उपस्थिति रही।