रचनाएं
विरल विशिष्ट व्यक्तित्व को मैं करती हूँ शत-शत वंदन
विरल विशिष्ट व्यक्तित्व को मैं करती हूँ शत-शत वंदन
परम पद के प्रवर पथिक को मेरा श्रद्धासिक्त नमन॥
आत्मा में उपवन में तुमने वैराग्य ज्ञान के फूल खिलाए
शम-दम-क्षय के दीवट पर अनगिन मंगल दीप जलाए
ऊर्जामयी अभिनव आभा को मेरा श्रद्धासिक्त नमन॥
मन मंदिर में स्वाध्याय ध्यान का नित प्रति आलोक बिखेरा
अगम वाणी वातायन से स्व-स्वरूप का चित्र नया उकेरा
शीतल चंदा जैसी उजली छवि को श्रद्धासिक्त नमन॥
अरुणम रथ पर अरुणम पथ पर चरण रहे तेरे गतिमान
मंजिल उसको निकट बुलाती भीतर बाहर है धृतिमान
समता ममता की मूरत को मेरा श्रद्धासिक्त नमन॥
शुभ अवसर है शुभ वासर है श्रमणी गण की हो श्रृंगार
करूं कामना यही भावना खोलो गण में प्रगति द्वार
वात्सल्यमयी तुम विमल विभूति मेरा श्रद्धासिक्त नमन॥