श्रद्धा री बाजै झणकार

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साध्वी सोमप्रभा, लाडनूँ

श्रद्धा री बाजै झणकार

चयन दिवस रै शुभ अवसर पर श्रद्धा री बाजै झणकार।
सति शेखरा रै चरणां में मंगल भावां रो उपहार॥
जन्म लियो चंदेरी भू पर, सरोज नाम हो थारो सुखकार।
जंवरीमलजी भंवरी बाई, तात मात स्यूं पाया संस्कार।
तुलसी रै कर कमलां दीक्षित, स्वप्न हुआं थारा साकार॥
समण श्रेणी में पहला दीक्षित, पहला नियोजिका इतिहास।
ज्ञान ध्यान में मस्त सदा ही, गुरु रो पायो पूर्ण विश्वास।
मुख्य नियोजिका पद पायो, महाप्रज्ञ गुरु कृपा अपार॥
प्रखर योग्यता कर्यो परीक्षण, महाश्रमण शासन सरदार।
साध्वी प्रमुखा पद सुशोभित, संभाल्यो जद स्यूं थे भार।
जीत्यो दिल साध्वी समाज रो, मीठो इमरत सो व्यवहार॥
कोड दिवाली राज करो थे, घणी करो शासन संभाल।
नवी नवेली चिंतन शैली, मां सी ममता हृदय विशाल।
अप्रमत्तता अजब गजब री, उन्नत है आचार विचार॥
चयन दिवस रै शुभ अवसर पर श्रद्धा री बाजै झणकार।
सति शेखरा रै चरणां में मंगल भावां रो उपहार॥