गुरुवाणी/ केन्द्र
भगवान महावीर के कैवल्य दिवस और आचार्य महाश्रमण के 17वें पट्टोत्सव का अनूठा संगम
बैशाख शुक्ल पक्ष की तिथियां तेरापंथ धर्मसंघ के इतिहास में स्वर्णाक्षरों में दर्ज हो गई हैं। जहां वैशाख शुक्ला नवमी को आचार्य श्री का 65 वां जन्मोत्सव मनाया गया, वही वैशाख शुक्ला दशमी को तेरापंथ के एकादशमाधिशास्ता, युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमण जी का 17वां पट्टोत्सव समारोह जैन विश्व भारती के प्रांगण में अभूतपूर्व हर्षोल्लास के साथ संपन्न हुआ।
साधना और समर्पण का संगम: समारोह का शुभारंभ आचार्य प्रवर के ओजस्वी महामंत्रोच्चार के साथ हुआ। जैन विश्व भारती परिसर अपने अनुशास्ता की अभिवंदना में पूरी तरह निखरा नजर आ रहा था। साध्वी वृंद द्वारा प्रस्तुत 'प्रज्ञा गीत' और संत वृंद की 'आचार्य वंदना' ने वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर कर दिया। इस अवसर पर शासन गौरव साध्वी कल्पलता जी सहित वरिष्ठ साध्वी व मुनि वृंद ने अपनी भावाभिव्यक्ति देकर गुरु चरणों में श्रद्धा निवेदित की।
'विजनरी और अजातशत्रु' हैं आचार्यवर : साध्वी प्रमुखा श्री विश्रुत विभा जी ने आचार्यश्री का विश्लेषण करते हुए उन्हें 'विजनरी, कोचिंग, डेमोक्रेटिक और एथलेटिक' आचार्य की उपमा दी। वहीं मुख्य मुनिश्री महावीर कुमार जी ने उन्हें 'अजातशत्रु' बताते हुए कहा कि आचार्यश्री पांच महाव्रतों और तीन गुप्तियों की सतत आराधना कर रहे हैं, जिनमें वीतरागता के स्पष्ट दर्शन होते हैं।
महावीर के मार्ग पर तेरापंथ शासन:
चतुर्विध धर्म संघ को अमृत देशना प्रदान करते हुए आचार्यश्री महाश्रमण जी ने फरमाया कि आज श्रमण भगवान महावीर का कैवल्य कल्याणक दिवस है। उन्होंने कहा, 'भगवान महावीर ने साढ़े बारह वर्षों की साधना के बाद आज ही के दिन केवल ज्ञान प्राप्त किया था। यह मेरा सौभाग्य है कि आज का दिन मेरे जीवन के दायित्व से भी जुड़ गया है। मुझे गुरुदेव तुलसी और आचार्य महाप्रज्ञ जैसे दो-दो महापुरुषों की असीम कृपा प्राप्त हुई।' आचार्यश्री ने आगे कहा कि आज पहली बार ऐसा अवसर आया है जब इतनी विशाल संख्या में साधु-साध्वी, समणी और श्रावक समाज इस पट्टोत्सव का साक्षी बना है।
बड़ी घोषणा : 2028 का चातुर्मास हिसार में : कार्यक्रम के दौरान हरियाणा से आए विशाल जनसमूह और विधायक सावित्री जिंदल की भावपूर्ण प्रार्थना को स्वीकार करते हुए आचार्यश्री ने एक बड़ी घोषणा की। आचार्य प्रवर ने वर्ष 2028 का चातुर्मास हिसार (हरियाणा) स्थित कुरुक्षेत्र गौशाला में करने की स्वीकृति प्रदान की। इस घोषणा के होते ही पूरा प्रवचन पांडाल 'गुरुदेव' के जयकारों से गुंजायमान हो उठा।
विशेष आकर्षण:
अद्भुत संयोग : भगवान महावीर का कैवल्य दिवस और आचार्यश्री का पट्टोत्सव एक ही तिथि पर।
गुरु कृपा : आचार्यश्री ने अपने निर्माण में गुरुदेव तुलसी और आचार्य महाप्रज्ञ के योगदान को याद किया।
विशाल उपस्थिति : लाडनूं के इतिहास में पहली बार पट्टोत्सव पर चारित्रात्माओं का इतना बड़ा जमघट।