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अक्षय तृतीया पर श्रद्धासिक्त विभिन्न कार्यक्रम
आचार्य श्री महाश्रमण जी के सुशिष्या साध्वी सौमयशाजी ठाणा-3 के सान्निध्य में अक्षय तृतीया कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत स्नेहा भंडारी के द्वारा मंगलाचरण से हुई। सभा अध्यक्ष प्रेमचंद सुराणा ने विभिन्न क्षेत्रों से पधारे श्रद्धालुगण एवं तपस्वी बहनों का स्वागत किया। साध्वी सोमयशाजी ने सभा को सम्बोधित करते हुए बताया कि भारतीय संस्कृति त्याग प्रधान है और अक्षय तृतीया की महत्वता को उजागर करते हुए भगवान ऋषभ के जीवन पर प्रकाश डाला। जीवन में सहिष्णुता के भाव को विकसित करने की प्रेरणा देते हुए बताया कि किस प्रकार धरती सबको अपने भीतर समता से समाती है, पानी निर्मलता से बहते हुए कोई छुआछूत न कर सबको समान रूप से प्राप्त होता है। उसी प्रकार मनुष्य के पास सबकुछ होते हुए भी धैर्य नहीं होता। हमें धरती एवं पानी की भांति धैर्यशील होना चाहिए। डॉ साध्वी सरल यशा जी ने जीवन के चार घटों के बारे में बहुत ही सुन्दर ढंग से बताया। ज्ञानशाला के बच्चों द्वारा भगवान ऋषभ के जीवन झांकी रोचक प्रस्तुति सराहनीय थी एवं सम्पूर्ण परिषद के मन को मोह गई। माधावरम से समागत् भाई देवीचंद मरलेचा ने गुरुकृपा एवं गुरु दृष्टि के चमत्कार का साक्षात दर्शन करवाया। कार्यक्रम का सफल संचालन साध्वी ऋषिप्रभाजी द्वारा किया गया |