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आचार्यश्री महाप्रज्ञजी के 17वें महाप्रयाण दिवस पर विविध कार्यक्रम
साध्वी अणिमाश्री जी एवं प्रोफेसर साध्वी मंगलप्रज्ञा जी के सान्निध्य में तेरापंथ सभा अहमदाबाद पश्चिम द्वारा आयोजित आचार्यश्री महाप्रज्ञ वार्षिक महाप्रयाण दिवस समारोह में उपस्थित धर्मपरिषद को सम्बोधित करते हुए साध्वी अणिमाश्री जी ने कहा - आचार्य श्री तुलसी और महाप्रज्ञ जी की जोड़ी विलक्षण थी। आचार्य तुलसी ने एक विलक्षण आचार्य संघ को दिया। परिवार और समाज के लिए महाप्रज्ञ जीवन आदर्श है, प्रेरणा है। घर परिवारों में यदि कुछ गुणों का प्रवेश हो जाए तो, शांति की स्थापना हो सकती है। चित्तवृत्ति सम और साध्वीश्री ने उनके जीवन-गुणों को व्यावहारिक करते हुए जीवन में अवतरित करने की प्रेरणा दी।
उन्होंने कहा - वीतराग तुल्य महाप्रज्ञ का जीवन सुदीर्घ जीवन धर्मशासना और जनोद्धार में व्यतीत हुआ। 59 वर्ष में युवाचार्य और 75 वर्ष की वय में आचार्य पद में क शाल करना भी एक ऐतिहासिक दस्तावेज है। इनके द्वारा प्रदत्त साहित्य-सम्पदा 'अनमोल विरासत है'। आवश्यकता है आवक-श्राविका समाज श्रेष्ठ रूप उनके साहित्य संसार की सैर कर अपने तन-मन को स्वस्थ बनाए और विशिष्ट संकल्पों के साथ नया उत्थान करे। सहजता और सरलता के पथ पर चरण-न्यास करे और कषाय चेतना को आवर्जित करने की साधना करे। इस अवसर पर प्रोफेसर साध्वी मंगलप्रज्ञा जी ने आचार्य श्री महाप्रज्ञ के कृतित्व, व्यक्तित्व और नेतृत्व को अद्वितीय बताते हुए कहा - समर्पण की चेतना के अनुपमेय उदाहरण हैं - आचार्य महाप्रज्ञ। मात्र तेरापंथ संघ ही नहीं देश-विदेशों में उनके प्रभावी 'प्रयोगों' की गूंज है। अनेक जीवन का हर पक्ष जनमानस के लिए - आलम्बन है, शक्ति सापेक्ष है। उनकी शरण और नजरों के जिसने आस्वाद लिए हैं, वह उन्हें कभी विस्मृत नहीं कर पाएगा। आचार्य श्री महाप्रज्ञ जी करुणा के महा सागर थे। उनके शिखर व आरोहण की कहानी बड़ी बेजोड़ है। अष्टमाचार्य दीक्षा गुरु कालूगणी और विद्यागुरु आचार्य तुलसी के अनुशासन और संरक्षण में उनका जीवन विकास पथग्रिम रहा। वे समन्वय के पुरोधा थे। समदेणा, विनम्रता से वे विश्व प्रतिष्ठित बन गए। साध्वी मंगलप्रज्ञा जी ने महाप्रज्ञ श्रीचरणों में बैठकर उपासना के अनुभवों को साझा करते हुए कहा - मैं लगभग 26 साल तक उस महाशक्ति का नैकट्य उपासना और शिक्षा ग्रहण का सौभाग्य प्राप्त हुआ। अन्तिम सांस की साक्षी बनी। ऐसे दिव्यात्मा का महिमा मंडल हजारों-हजारों वर्षों तक जीवित रहेगा। पश्चिम तेरापंथ महिला मंडल ने मंगलसंगान किया। अहमदाबाद पश्चिम सभा मंत्री संजय पारख ने श्रद्धासिक्त विचार प्रस्तुत किए। साध्वी डॉ चैतन्य प्रभा जी ने कहा - कि आचार्य महाप्रज्ञ जी अप्रतिम व्यक्तित्व के धनी और विशिष्ट अवदान प्रदायक थे। साध्वी सुदर्शन प्रभा ने अपने श्रद्धा स्वर समर्पित करते हुए कहा - महामना आचार्य श्री महाप्रज्ञ जी ने युग को अनेक कीर्तिमान स्वे गए। साध्वी मैत्री प्रभा जी ने आत्म स्वरों की अभिव्यक्ति में कहा - उनका जीवन हमें समर्पित भक्ति और गुरु के प्रति विशिष्ट अनुशक्ति की प्रेरणा देने वाला था। साध्वी समत्वयशा ने सुरीले स्वरों में श्रद्धा संगान कर वातावरण को सुरम्य बना दिया। साध्वी कणिकाश्री ने अभ्यर्थना प्रस्तुति करते हुए कहा - आचार्य श्री महाप्रज्ञ अनुपम व्यक्तित्व के धनी थे। जरूरत है करुणा और समत्व भाव के युग हमारे भीतर भी संप्राण हों। साध्वी डॉ शौर्य प्रभा जी ने कुशल मंच संचालन करते अपने संयोजकीय वक्तव्य में कहा - युगप्रधान आचार्य महाप्रज्ञ जी विकास पुरुष और श्रम के देवता थे।