बढ़ती उम्र के साथ परिग्रह को करें कम : आचार्यश्री महाश्रमण

गुरुवाणी/ केन्द्र

रोयल पाम। 03 मार्च, 2025

बढ़ती उम्र के साथ परिग्रह को करें कम : आचार्यश्री महाश्रमण

महामनीषी आचार्यश्री महाश्रमणजी ने प्रेरणा पाथेय प्रदान करते हुए फरमाया कि शास्त्रों में इच्छा को आकाश के समान अनंत बताया गया है। यदि थोड़ा मिल जाता है, तो फिर और पाने की इच्छा उत्पन्न हो जाती है, और यह क्रम निरंतर चलता रहता है। साधना के क्षेत्र में इच्छाओं का परिसीमन और अनिच्छा का भाव आवश्यक है। गृहस्थों का पारिवारिक एवं सामाजिक जीवन होता है, ऐसे में इच्छाओं का पूर्णतः त्याग करना कठिन हो सकता है, लेकिन उनका अल्पीकरण संभव है। यदि अनिच्छा की स्थिति प्राप्त न हो सके, तो भी अत्यधिक इच्छाओं से बचा जा सकता है। बढ़ती उम्र के साथ परिग्रह को कम करें, स्वामित्व का मोह त्यागें, और संयम की ओर अग्रसर हों। अनावश्यक उपभोग और उपयोग से बचें। छोटे-छोटे त्याग करने से आंतरिक चेतना जागृत हो सकती है। गृहस्थों को अपने जीवन में एक पड़ाव के बाद साधु जैसा जीवन जीने का प्रयास करना चाहिए। श्रावक की प्रतिमाएं ग्रहण करने और सुमंगल साधना स्वीकार करने से त्याग की भावना मजबूत हो सकती है। इच्छाएं आकाश के समान अनंत होती हैं, लेकिन प्रयासों से उन्हें नियंत्रित किया जा सकता है। इच्छाओं के संयम से समाज भी श्रेष्ठ बन सकता है। धर्म के माध्यम से अनेक समस्याओं से बचा जा सकता है। ढलती उम्र में संयम को अपनाना चाहिए, जीवन में साधना का समावेश करना चाहिए और धार्मिक सेवा-कार्य में संलग्न रहना चाहिए। सभा-संस्थाओं की जिम्मेदारियों से धीरे-धीरे मुक्त होकर मार्गदर्शन तक सीमित रहना उचित हो सकता है। इससे जीवन में धार्मिकता बढ़ती है। उम्र बढ़ने के साथ जीवन को एक नए मोड़ पर ले जाना चाहिए और आत्मा के कल्याण हेतु प्रयास करना चाहिए। इस दुर्लभ मानव जीवन का हमें सर्वोत्तम उपयोग करना चाहिए और इसे धार्मिक गतिविधियों में लगाना चाहिए।
युवावस्था है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि बेईमानी आवश्यक हो। जहां तक संभव हो, त्याग की भावना को अपनाने का प्रयास करें। धर्म का संचय निरंतर करते रहें। जिस प्रकार धन का लेखा-जोखा रखा जाता है, उसी प्रकार हमें आत्मा का भी लेखा-जोखा रखना चाहिए और इसके प्रति जागरूक रहना चाहिए। इच्छाएं दो प्रकार की होती हैं - धार्मिक इच्छाएं और परिग्रह की इच्छाएं। जितना अधिक आध्यात्मिक विकास करें, उतना ही उचित है। पूज्यवर के स्वागत में रोयल पाम से दीपक चंदनानी ने अपनी भावना व्यक्त की। कार्यक्रम का संचालन मुनि दिनेशकुमारजी ने किया।