चरित्र निर्माण की बुनियाद है अणुव्रत

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जयपुर।

चरित्र निर्माण की बुनियाद है अणुव्रत

अणुव्रत विश्व भारती सोसायटी द्वारा निर्देशित 77वें अणुव्रत स्थापना दिवस का कार्यक्रम 'शासनगौरव' बहुश्रुत साध्वी कनकश्री जी के सान्निध्य में अणुव्रत समिति, जयपुर द्वारा आयोजित किया गया।
कार्यक्रम की शुरुआत महामंत्रोच्चारण से हुई। अणुव्रत समिति के युवा कार्यकर्ताओं कमलेश बरड़िया, गणपत भंडारी और सौरभ जैन ने अणुव्रत गीत की प्रस्तुति दी। अणुविभा केंद्र के महाप्रज्ञ सभागार में आयोजित इस कार्यक्रम को संबोधित करते हुए 'शासनगौरव' साध्वी कनकश्री जी ने अणुव्रत को मानवधर्म, असांप्रदायिक धर्म और राष्ट्रीय चरित्र निर्माण का आधार बताया। उन्होंने कहा कि धर्मक्रांति के सूत्रधार आचार्यश्री तुलसी ने जन-जन की नैतिक चेतना जगाने के उद्देश्य से 1 मार्च 1949 को अणुव्रत आंदोलन का प्रवर्तन किया था।
आचार्यश्री महाप्रज्ञ ने अणुव्रत की दार्शनिक व्याख्या कर इसे प्रबुद्ध वर्ग तक पहुँचाया, और वर्तमान में आचार्यश्री महाश्रमण अपनी ऐतिहासिक देशव्यापी अहिंसा यात्रा के माध्यम से साम्प्रदायिक सद्भाव, नैतिक जागरूकता और नशामुक्ति का संदेश देकर मानवीय मूल्यों की प्रतिष्ठा का भगीरथ प्रयास कर रहे हैं। सात्विक और सदाचारी जीवन जीने की प्रेरणा देते हुए साध्वीश्री ने कहा कि सदाचार केवल शब्दों तक सीमित न रहे, बल्कि उसे आचरण में उतारना आवश्यक है। साध्वीवृंद ने 'लोकपुरुष की ज्योतिर्मय यात्रा' गीत का सामूहिक संगान किया।
अणुव्रत समिति जयपुर के अध्यक्ष विमल गोलछा ने स्वागत भाषण द्वारा सभी आगंतुकों का अभिनंदन किया। अणुव्रत लेखक पुरस्कार से सम्मानित नरेन्द्र शर्मा (कुसुम) ने काव्य के माध्यम से अपनी भावनाएँ व्यक्त कीं। जयपुर पब्लिक स्कूल की नन्हीं छात्राएं, काव्या ठाकुर (द्वितीय कक्षा) और महिमा चौधरी (तृतीय कक्षा) ने कविता के माध्यम से आचार्य तुलसी के प्रति अपनी श्रद्धा अर्पित की। इसी क्रम में, दसवीं कक्षा की छात्राओं नैनिका सिंग और गरिमा सैन ने अणुव्रत के संदर्भ में अपने विचार साझा किए। इस अवसर पर तेरापंथी सभा के अध्यक्ष शांतिलाल गोलछा, अणुविभा के अध्यक्ष पन्नालाल बैद सहित कई प्रतिष्ठित सभा-संस्थाओं के गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। अणुव्रत समिति जयपुर की मंत्री जयश्री सिद्धा ने कार्यक्रम का संयोजन किया, जबकि अणुव्रत समिति के सहमंत्री पवन जैन ने आभार व्यक्त किया।