जीवन के कल्याण के लिए करें साधु की उपासना: आचार्यश्री महाश्रमण

गुरुवाणी/ केन्द्र

जीवन के कल्याण के लिए करें साधु की उपासना: आचार्यश्री महाश्रमण

परेऊ, 15 जनवरी, 2023
तीर्थंकर के प्रतिनिधि आचार्यश्री महाश्रमण जी प्रातः लगभग 12 किलोमीटर का विहार कर परैव पधारे। उपस्थित जनमेदिनी को मंगल प्रेरणा पाथेय प्रदान करते हुए परम पावन ने फरमाया कि आदमी के जीवन में निमित्त और उपादान का प्रभाव होता है, हो सकता है। उपादान मूल और निमित्त सहायक कारण है। कारण से कार्य होता है और तपस्या से निर्जरा होती है। कर्म निर्जरा में तपस्या कारण है और भी कारण हो सकते हैं। कार्य होने में सहायक कारण है। हम हमारे जीवन में अनेक संदर्भों में उपादान और निमित्त खोज सकते हैं। गुस्से का मूल उपादान कारण मोहनीय कर्म है।
आदमी के जीवन में परिष्कार आता है। साधु श्रमण महान की उपासना करो। आपको सुनने का लाभ मिल सकेगा। अच्छी आर्ष वाणी सुनने से कान पवित्र हो जाते हैं। सुनने से हमें ज्ञान मिलता है। ज्ञान से विशेष ज्ञान होगा कि क्या हेय है, क्या उपादेय है। विशेष ज्ञान से प्रत्याख्यान होगा। प्रत्याख्यान से संयम और संयम से आश्रव रुक सकता है। संवर से तपस्या होगी एवं तपस्या से निर्जरा होगी। आगे करते-करते अक्रिया-अयोग अवस्था होगी और मोक्ष मिल जाएगा।
साधुओं का निमित्त और खुद का क्षयोपशम का निमित्त मिलने से आदमी कहाँ से कहाँ पहुँच सकता है। गुरु से आगे चेला निकल सकता है। गुरु गुड़ रहा, चेला शक्कर हो गया। बाप से आगे बेटा निकल सकता है। अच्छा शिष्य मिलना गुरु का भाग्य है। अच्छे बेटे का मिलना बाप का भाग्य है। घड़े में तो पानी समाता है, पर घड़े में पैदा हुए अगस्त्य ऋषि समुंद्र को पी गए। योग-भाग्य की करामात हो सकती है। हम श्रमशील बनें, सुविधावादी न बनें। संतों की संगति जितनी मिले करने का प्रयास करें।
पूज्यप्रवर ने परेऊवासियों को सद्भावना, नैतिकता और नशामुक्ति के संकल्पों को समझाकर संकल्प स्वीकार करवाए। पूज्यप्रवर के स्वागत में स्थानीय सरपंच बांकाराम चैधरी परेऊ मठाधीश औंकार भारती महाराज ने अपनी भावना अभिव्यक्त की। आशादेवी गोलछा ने 41 व टीना श्रीश्रीमाल देवी ने 30 की तपस्या के प्रत्याख्यान पूज्यप्रवर से ग्रहण किए। कार्यक्रम का संचालन मुनि दिनेश कुमार जी ने किया।