अद्वित्तीय युगपुरुष थे आचार्य तुलसी

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अद्वित्तीय युगपुरुष थे आचार्य तुलसी

डेगाना
तेरापंथ धर्मसंघ के नवम आचार्यश्री तुलसी का 27वां महाप्रयाण दिवस साध्वी प्रांजल प्रभाजी के सान्निध्य में आयोजित हुआ। इस कार्यक्रम का मंगलाचरण मोक्षा चोरड़िया द्वारा सुमधुर गीतिका के संगान से हुआ। राष्ट्रसंत तुलसी के प्रति अपने हृदयोद्गार प्रस्तुत करते हुये साध्वी प्रांजलप्रभाजी ने फरमाया कि आचार्य तुलसी का बाह्य व अंतरंग दोनों व्यक्तित्व उदार थे। मात्र 11 वर्ष की बाल वय में संयम जीवन स्वीकार कर आप आत्म विशुद्धि के पथ पर अग्रसर हुये। 22 वर्ष की तरूणाई में तेरापंथ जैसे सुदृढ़ धर्मसंघ के सरताज बने। जीवन के तीसरे दशक में 'असली आजादी अपनाओ' का घोष देकर जनमानस के अंत:स को जागृत किया। 1 मार्च 1949 में आम जन मानस को ध्यान में रखकर 'अणुव्रत आंदोलन' का प्रवर्तन किया, जिसमें तत्कालीन राजनैतिक महत्व के व्यक्तियों का भी समर्थन मिला।
साध्वीजी ने आगे फरमाया कि संसार में तीन प्रकार के व्यक्ति होते हैं। प्रथम प्रकार के गुलाब के पौधे के समान, जिस प्रकार गुलाब के फूल होता है पर फल नहीं लगता उसी प्रकार प्रथम प्रकार के व्यक्ति स्वकेन्द्रित होते हैं, वे केवल अपना स्वार्थ साधने में लगे रहते हैं। दूसरे प्रकार के व्यक्ति आम के वृक्ष की भांति होते हैं, जिसके बेर व फल दोनों होते हैं, साथ ही शीतल छाया से मनुष्य को शीतलता प्रदान करते हैं, उसी प्रकार इस प्रकार के व्यक्ति आत्महित के साथ-साथ परहित के लिये विकास के नये आयाम उद्घाटित करते हैं, विकास के नये-नये क्षितिज रखते हैं। तीसरे प्रकार के व्यक्ति कटहल के वृक्ष की भांति होते हैं, जो केवल आत्महित को केन्द्र में रखते हैं। आचार्य तुलसी द्वित्तीय प्रकार के अद्वित्तीय युगपुरुष थे। आपने आत्म कल्याण के साथ-साथ जन कल्याण हेतु स्वयं के जीवन को झोंका।
साध्वीजी ने आचार्य तुलसी के प्रमुख अवदान अणुव्रत की स्थापना के 75वें वर्ष के अवसर पर अणुव्रत के छोटे-छोटे जीवनोपयोगी संकल्पों को स्वीकार करने की प्रेरणा दी।
कार्यक्रम में साध्वी गौतमप्रभाजी ने सुमधुर गीतिका के माध्यम से आचार्य तुलसी के अवदानों को बताया। इस अवसर पर डेगाना जैन समाज के अध्यक्ष पुखराज चौरड़िया, प्रकाश सुराणा, विमल कोठारी, प्रवीण चौरड़िया, मनीष भण्डारी, रिखब चौरड़िया, संदीप चौरड़िया, महिला मंडल से सुमित्रा सुराणा, शान्ति देवी कोठारी, लाडा देवी चौरड़िया, शीतल चौरड़िया, कौशल्या देवी सुराणा, सुनिता कोठारी, सोनल चौरड़िया आदि की उपस्थिति रही।