अध्यक्षीय

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अनंत आस्था के केंद्र परमपूज्य आचार्यश्री महाश्रमण जी के पावन आशीर्वाद एवं युवा शक्ति के सहयोग से अभातेयुप के 55वें वार्षिक अधिवेशन पर उदयपुर में 3 अक्टूबर, 2021 को सत्र-2021-2023 के द्विवर्षीय कार्यकाल के लिए अभातेयुप के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में संघ सेवा का पावन और दुर्लभ अवसर मिला। 4 अक्टूबर, 2021 को दायित्व ग्रहण के साथ ही मन में बस एक ही संकल्प था कि ‘संघ का काम हो संघ का नाम हो।’
पद तो एकमात्र संवैधानिक व्यवस्था है परंतु इन दो वर्षों में जो भी कार्य हुए उनमें पूजयप्रवर का आशीर्वाद, पूर्व अध्यक्षों एवं पदाधिकारियों का सहयोग और युवा शक्ति का अनन्य श्रम और सहभागिता रही है।
दायित्व ग्रहण के साथ ही टीम के साथ मिलकर द्विवर्षीय कार्यकाल हेतु कार्यकर्ता-कार्यालय-कार्यक्रम और कोष-इन चार बिंदुओं को दृष्टिगत कर कुछ लक्ष्य निर्धारित किए। इस दृष्टि से किशोरों और युवा शक्ति को जोड़ने के उद्देश्य से सदस्यता अभियान चलाया गया। संगठन को सुचारु रूप से चलाने के लिए जैन विश्व भारती प्रांगण में अभातेयुप की विरासत ‘युवालोक’ भवन में केंद्रीय कार्यालय का नवनिर्माण कराया। जिसका उद्घाटन परमपूज्य आचार्यप्रवर के मंगलपाठ से हुआ। कार्यकर्ताओं और कार्यालय के पश्चात कार्यक्रमों के संदर्भ में देश-भर में अभातेयुप के तत्त्वावधान में युवा सम्मेलन, विभिन्न आयामों की कार्यशालाएँ आयोजित कर अनेक नए कार्यकर्ताओं को जोड़ा और परिषदों में नव उत्साह का संचार किया। इन कार्यक्रमों में अभातेयुप को समाज के हर वर्ग से मुक्तहस्त आर्थिक सहयोग मिला जिससे अभातेयुप की गतिविधियाँ, निर्बाध रूप से गतिमान हो रही हैं।
भगवान पाश्र्वनाथ जन्म कल्याणक, आचार्यप्रवर के षष्टिपूर्ति महोत्सव और आचार्य भिक्षु जन्मोत्सव पर युवा शक्ति त्याग, उपवास एवं विभिन्न आध्यात्मिक संकल्पों से अध्यात्म के मार्ग पर गतिमान हुई। मैं हूँ सामायिक साधक के अंतर्गत शनिवारीय सामायिक और नववर्ष के प्रथम रविवार को अभिनव सामायिक फेस्टिवल का आयोजन कर संपूर्ण जैन समाज को अध्यात्म की रश्मियों से अभिष्णात किया। आचार्यप्रवर द्वारा प्रदत्त आयाम वीतराग पथ के अंतर्गत देश-भर के 237 कार्यशालाओं का आयोजन हुआ, जिसमें हजारों बच्चों को वीतराग पाथिक बनने की प्रेरणा दी गई। बारह व्रत कार्यशाला, सम्यक् दर्शन कार्यशाला, जैन विद्या कार्यशाला ने भी युवा शक्ति सहित सकल समाज को अध्यात्म का पाठ पढ़ने की प्रेरणा दी और 10000 से अधिक प्रतिभागी इसमें संभागी बने।
युवाओं को चारित्रात्माओं को साधुचर्या को जानने, रास्ते की सेवा करने का माध्यम ‘युवावाहिनी’ के अंतर्गत 150 से अधिक परिषदों के हजारों युवकों ने रास्ते की सेवा कर ‘चैका सत्कार’ का लाभ उठाया। युवावाहिनी के अंतर्गत नवीन बस का लोकार्पण भी सूरत में किया गया। लौकिक एवं मांगलिक कार्यक्रमों में जैनत्व के स्वीकरण एवं भौतिकता में सीमाकरण की द्योतक जैन संस्कार विधि के अंतर्गत 551 मान्यता प्राप्त संस्कारकों के माध्यम से 4300 से अधिक कार्यक्रम हुए, जो जैन संस्कार विधि की स्वीकार्यता को दर्शाते हंै।
सामाजिक आयामों की बात करें तो मेगा ब्लड डोनेशन ड्राईव, नेत्रदान और आचार्य तुलसी डायग्नोस्टिक सेंटर ने आज तेरापंथी या जैन समाज ही नहीं अपितु जैनेत्तर समाज में भी तेरापंथ धर्मसंघ के परचम को शिखरों पर चढ़ाया है।
एमबीडीडी-2022 में भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं कल्याण मंत्रालय के साथ भारत के सभी राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों में 6000 से अधिक शिविर और 2 .5 लाख से अधिक यूनिट रक्त संग्रह कर नव इतिहास का सृजन किया। जिसकी गूँज केवल भारत में ही नहीं अपितु विदेशों में भी हुई। नेत्रदान में भारत में होने वाले योगदान का 4 प्रतिशत हिस्सा अभातेयुप के माध्यम से हो रहा है। यह अपने आपमें विशेष है। आचार्य तुलसी डायग्नोस्टिक सेंटर के माध्यम से प्रतिवर्ष लाखों लोग लाभान्वित हो रहे हैं। इस कार्यकाल में 9 डायग्नोस्टिक सेंटर 7 डेंटल चैयर्स व 9 मेडिकल सेंटर का भी शुभारंभ हुआ है।
आपदा प्रबंधन में तेरापंथ टास्क फोर्स, युवा शक्ति में स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करने हेतु फिट युवा-हिट युवा, शहरों में संस्कारयुक्त शिक्षा के लिए आचार्य तुलसी जैन हाॅस्टल और व्यक्तित्व को निखारने के लिए व्यक्तित्व विकास कार्यशालाएँ, काॅन्फिडेंट पब्लिक स्पीकिंग, संगीत की प्रतिभाओं को मंच प्रदान करने के लिए सरगम भी समाज हित में अनुकरणीय रहा है।
किशोर मंडल के माध्यम से किशोरों को धर्मसंघ से जोड़ने के लिए समय-समय पर विभिन्न कार्यक्रम और किशोर मंडल अधिवेशन भी अपने आप में विशिष्ट है।
अभातेयुप का महत्त्वपूर्ण आयाम है-प्रकाशन, जिसमें अखिल भारतीय तेरापंथ टाइम्स, युवादृष्टि, इंजिनियस युवा के माध्यम से संघीय समाचार और प्रबुद्धजनों के विचार जन-जन तक पहुँच रहे हैं।
इन सबके अतिरिक्त देश-भर की सभी परिषदों के साथियों की जब कभी भी जरूरत पड़ी सभी ने खुले मन से सहयोग दिया व हर कार्यक्रम को सफल बनाया। दो वर्षीय इस कार्यकाल की संपन्नता पर आज मैं संपूर्ण युवा शक्ति के श्रम और समर्पण को नमन करता हूँ क्योंकि इनके सहयोग के बिना कुछ भी संभव नहीं है।
इन दो वर्षों में मुझे तेरापंथ धर्मसंघ के मुखपत्र अखिल भारतीय तेरापंथ टाइम्स, जेटीएन और युवादृष्टि के प्रधान संपादक के रूप में भी कार्य करने का अवसर मिला और हमारा यह प्रयास रहा कि ये आपके विश्वास पर खरा उतरे।
संपादन के कार्य में तेरापंथ टाइम्स के कार्यकारी संपादक श्री दिनेश मरोठी, युवादृष्टि संपादक श्री विपिन पीतलिया, प्रकाशन प्रभारी श्री जितेंद्र परमार, अमित सेठिया, हनुमान दुगड़, विमल गुलगुलिया, दिनेश शर्मा, लाडनूं कार्यालय से राजेंद्र खटेड़, हरीश स्वामी, गौरी, कमल शर्मा, आर्यन का विशेष सहयोग मिला।
मेरे पूज्य पिताजी श्री शिखरचंद डागा, माताजी श्रीमती विमला देवी को नमन करता हूँ जिनके आशीर्वाद और सद्संस्कारों से इस दायित्व को सफलतापूर्वक निर्वहन कर पाया। मेरी धर्मपत्नी रेखा कोठारी, पुत्र खुशहाल-लक्ष्य, पुत्री हिमांशी एवं मेरे सभी शुभचिंतकों का अपने दायित्व निर्वहन में सहयोगी बनने हेतु सदैव ऋणी रहूँगा।
अनंत कृतज्ञता पूज्यप्रवर के प्रति जिनका मंगल आशीर्वाद पल-पल मेरे साथ रहा। इस कार्यकाल में दायित्व निर्वहन में साध्वीप्रमुखाश्री विश्रुतविभा जी, मुख्य मुनि महावीर कुमार जी का पावन आशीर्वाद व मार्गदर्शन अविस्मरणीय रहा। अनन्य कृपा रही मुनिश्री दिनेश कुमार जी, अभातेयुप आध्यात्मिक पर्यवेक्षक मुनि योगेश कुमार जी, मुनि नयकुमार जी एवं समस्त चारित्रात्माओं की। मैं आपके सतत मार्गदर्शन हेतु कृतज्ञता एवं खमतखामणा के भाव प्रकट करता हूँ।
इस दायित्व निर्वहन में अगर किसी की भावना का यथेष्ट सम्मान नहीं कर सका हूँ तो कार्यकाल की संपन्नता पर संपूर्ण केंद्रीय संस्थाओं, अभातेयुप साथीगण, शाखा परिषदों की संपूर्ण युवाशक्ति एवं सकल समाज से खमतखामणा करता हूँ।
अभातेयुप के नव नेतृत्व के प्रति अग्रिम शुभकामनाओं के साथ मैं संकल्प लेता हूँ कि धर्मसंघ एवं अभातेयुप को सदैव निर्बाध रूप से यथाशक्ति सेवा देता रहूँगा। इस कार्यकाल में आप सभी का जो आशीष, स्नेह और सहयोग मिला है वह मेरे जीवन की अमूल्य धरोहर है जो सदैव मेरे मानस पटल पर अंकित रहेगा। बस यही कामना है कि-‘संघ का काम हो-संघ का नाम हो’।
- पंकज डागा
प्रधान संपादक