ईमानदारी है सबसे अनमोल संपत्ति : आचार्यश्री महाश्रमण

गुरुवाणी/ केन्द्र

गांधीधाम। 17 मार्च, 2025

ईमानदारी है सबसे अनमोल संपत्ति : आचार्यश्री महाश्रमण

अध्यात्म के सुमेरु आचार्यश्री महाश्रमणजी ने गांधीधाम के महावीर आध्यात्मिक समवसरण में वर्तमान प्रवास के अंतिम दिवस पावन प्रेरणा देते हुए कहा कि ईमानदारी जीवन की सबसे बड़ी संपत्ति होती है। वित्त और वृत्त – ये दो महत्वपूर्ण शब्द हैं। वृत्त का अर्थ है चरित्र, जिसे व्यक्ति को प्रयत्नपूर्वक सुरक्षित रखना चाहिए। दूसरा शब्द वित्त का अर्थ है धन, जो कभी आता है और कभी चला जाता है। धन के चले जाने से उतना नुकसान नहीं होता, जितना चरित्र के नष्ट होने से होता है।
व्यक्ति को अपने चरित्र पर विशेष ध्यान देना चाहिए। चोरी, झूठ और कपट से बचना चाहिए। बाहरी आकर्षण, गुस्से या भय के कारण झूठ बोलने से बचना चाहिए। हंसी-मजाक में भी किसी को मूर्ख बनाना या झूठ बोलना अनुचित है। साधु के लिए सर्व मृषावाद विरमण महाव्रत होता है, जबकि गृहस्थों के लिए अणुव्रत का पालन आवश्यक है। ईमानदारी सभी धर्मों और संप्रदायों में महत्वपूर्ण मानी जाती है।
अहिंसा और ईमानदारी– एकता का आधार
अहिंसा और ईमानदारी ऐसे मूल्य हैं, जो सभी को एक मंच पर जोड़ सकते हैं। अणुव्रत आंदोलन सभी के लिए समान रूप से उपयोगी है और इसे हर व्यक्ति स्वीकार कर सकता है। राजनीति, व्यापार और सामाजिक व्यवहार में नैतिकता और ईमानदारी आवश्यक है। आत्मा के कल्याण के लिए सरलता और सच्चाई को अपनाएं। किसी पर झूठा आरोप न लगाएं और अपनी वाणी पर संयम रखें। कपटपूर्ण भाषा से बचें। कपड़ों और आभूषणों से अधिक सद्गुणों और ज्ञान को महत्व दें।
पूज्यवर ने आगे कहा- गांधीधाम में इस बार का प्रवास थोड़ा लंबा रहा, जो आंशिक चातुर्मास जैसा अनुभव प्रदान कर गया। जैन-जैनेत्तर समुदायों का अच्छा सहयोग और धार्मिक भावना बनी रही।
गांधीधाम प्रवास के तेरहवें दिन मंगल भावना समारोह के अंतर्गत तेरापंथ महिला मण्डल ने गीत का संगान किया। मर्यादा महोत्सव व्यवस्था समिति-भुज के उपाध्यक्ष वाणीभाई, भाजपा के पूर्व विधायक पंकजभाई मेहता, गुजरात विधानसभा की पूर्व स्पीकर डॉ. निमाबेन आचार्य, गांधीधाम सभा के पूर्व अध्यक्ष त्रिभुवन जैन ने अपनी आस्थासिक्त अभिव्यक्ति दी। कार्यक्रम का कुशल संचालन मुनि दिनेशकुमारजी ने किया।