बहुश्रुत की उपासना से बदल सकती है जीवन की दशा और दिशा : आचार्यश्री महाश्रमण

गुरुवाणी/ केन्द्र

गांधीधाम। 18 मार्च, 2025

बहुश्रुत की उपासना से बदल सकती है जीवन की दशा और दिशा : आचार्यश्री महाश्रमण

तेरापंथ धर्मसंघ के एकादशम अधिशास्ता आचार्यश्री महाश्रमणजी गांधीधाम के अमर पंचवटी क्षेत्र में 13 दिवसीय प्रवास संपन्न कर अष्टमंगल कॉलोनी में स्थित राजूभाई मेहता परिवार के निवास स्थान में पधारे। अष्टमंगल समवसरण में परम पूज्य ने अपने अमृत वचनों में फरमाया - शास्त्र में बताया गया है कि इहलोक और परलोक का हित हो और जिससे सुगति की प्राप्ति हो सके, उसके लिए श्रमण धर्म स्वीकार करना चाहिए। श्रमण धर्म को स्वीकार करने के लिए पहले उसकी अच्छी जानकारी हो, उसके प्रति श्रद्धा हो। इसलिए व्यक्ति को बहुश्रुत की उपासना और पर्युपासना करनी चाहिए और उनसे अर्थ का विनिश्चय करना चाहिए।
साधु और ज्ञानी के संपर्क में रहने से धर्म और जीवन की सही समझ विकसित होती है। सम्यक ज्ञान प्राप्त कर यदि चारित्र का विकास किया जाए, तो व्यक्ति बहुत कुछ प्राप्त कर सकता है। ज्ञान केवल पुस्तकीय न होकर अनुभव और तत्वबोध से जुड़ा होना चाहिए। आचार्यश्री ने अपने बचपन के अनुभव साझा करते हुए कहा - 'मुनिश्री सुमेरमलजी (लाडनूं) और मुनिश्री सोहनलालजी (चाड़वास) उच्च कोटि के तत्वज्ञ संत थे। मुझे उनके सान्निध्य में ज्ञान और तत्वबोध प्राप्त करने का अवसर मिला। तेरापंथ धर्मसंघ के दान और दया के सिद्धांतों की गहराई को समझने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। मुनिश्री सुमेरमलजी के सत्संग से मेरा वैराग्य पुष्ट हुआ और मैंने दीक्षा ग्रहण करने का संकल्प लिया।'
आचार्य श्री ने आगे फरमाया कि गृहस्थ भी ज्ञानी हो सकते हैं और प्रवचन के माध्यम से मार्गदर्शन प्राप्त कर सकते हैं। प्रवचन केवल ज्ञान की अभिव्यक्ति नहीं, बल्कि जीवन में सही दिशा देने वाला होना चाहिए। आचार्यश्री भिक्षु उदाहरणों के माध्यम से ज्ञान को सरल और प्रभावी रूप में प्रस्तुत करते थे। बहुश्रुत की उपासना से जीवन की दशा और दिशा बदल सकती है, जिससे व्यक्ति श्रामण्य (संयम) की ओर अग्रसर हो सकता है। आचार्य प्रवर के मंगल प्रवचन के पश्चात साध्वीप्रमुखाश्री विश्रुतविभाजी ने कहा कि आचार्यवर जहां पधारते हैं, वहां श्रद्धालुओं की भीड़ स्वतः एकत्रित हो जाती है। जैसे जहां राम होते हैं, वहां अयोध्या का निर्माण हो जाता है, वैसे ही तेरापंथ के आचार्य जहां होते हैं, वहां भक्तिभाव का संचार हो जाता है। पूज्यवर के दर्शन से पापों का क्षय होता है और पुण्यों का संचय बढ़ता है।
अष्टमंगल क्षेत्र की बहनों ने स्वागत गीत प्रस्तुत किया। तेरापंथी सभा-गांधीधाम के मंत्री राजूभाई मेहता, तेरापंथ युवक परिषद के उपाध्यक्ष मुकेश भंसाली, उपासक पारसमल बाफना, कसक मेहता, अशोक संघवी, माणकचंद बाफना, प्रवीण बाफना, ईशानी डोशी आदि ने अपनी भावनाएं व्यक्त कीं। ज्ञानशाला के विद्यार्थियों ने सुंदर प्रस्तुति दी। प्रेक्षाध्यान प्रशिक्षक पारसमल दुगड़ ने प्रेक्षाध्यान के महत्व पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम का कुशल संचालन मुनि दिनेशकुमारजी ने किया।