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होली पर्व पर विविध कार्यक्रम
गांधीनगर स्थित तेरापंथ भवन में साध्वी संयमलता जी के सान्निध्य में विशेष कार्यक्रम 'होली के रंग, अध्यात्म के संग' का आयोजन किया गया। इस अवसर पर रंगों के साथ ध्यान और मंत्रों का प्रयोग कराया गया। साध्वी संयमलता जी ने श्रावकों को संबोधित करते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति पर्वों एवं त्योहारों की संस्कृति है। होली का पर्व आनंद और उल्लास का त्योहार है, यह मैत्री, समानता, सामंजस्य और सौहार्द का प्रतीक है। बसंत ऋतु का यह बासंती त्योहार खुशियों का दिन होता है, जो हमारे जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाता है। रंग हमारे स्वभाव पर गहरा प्रभाव डालते हैं, इसलिए हमें उनके माध्यम से अपने व्यवहार में सकारात्मक परिवर्तन लाने का प्रयास करना चाहिए। साध्वी मार्दवश्री जी ने विभिन्न रंगों के प्रभाव और उनके प्रयोग के महत्व को स्पष्ट करते हुए अनुष्ठान का प्रारंभ किया। उन्होंने बताया कि आठ कर्मों के क्षय और क्षयोपशम के लिए बीजाक्षरों तथा रंगों का प्रयोग किया जाता है। सामाजिक विसंगतियों को दूर करने और मोहनीय कर्म के क्षयोपशम के लिए विशुद्धि केंद्र पर नीले रंग के ध्यान का अभ्यास कराया गया। साथ ही, शुभ नाम और गोत्र कर्म के पूद्गलों की जागृति के लिए भी प्रयोग किए गए, जिससे व्यक्ति को यश और नाम की प्राप्ति होती है।