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होली पर्व पर विविध कार्यक्रम
भारतीय त्योहारों की परम्परा में होली का त्योहार अपनी विशिष्ट पहचान लिए हुए है। यह त्योहार रंगों की रागिनी के साथ मानव जाति को विकृति से संस्कृति की ओर गतिमान होने की प्रेरणा प्रदान करता है। इस त्यौहार का आगमन प्रकृति के मिलन में उल्लास और उमंग भरे वातावरण का निर्माण करता है। उपरोक्त विचार युगप्रधान आचार्य महाश्रमणजी के सुशिष्य मुनि मोहजीतकुमारजी ने तमिलनाडु के प्रसिद्ध तीर्थक्षेत्र कृष्णगिरी में होली चातुर्मास के समारोह में प्रकट किये। मुनिश्री ने होली के सांस्कृतिक महत्व को प्रकट करते हुए कहा कि होली का त्योहार प्रेम, स्नेह, सौहार्द और सद्भावों के साथ जुड़ा हुआ है। होली की रंगीन छटा व्यक्ति के मन और भावों में आनन्द प्रकट करती है। तनाव और अवसाद के युग में व्यक्ति के भीतर आनन्द की रंगीन बहार बहे। कार्यक्रम में मुनिश्री ने रंगों का ध्यान करवाया। दुनिया के प्रत्येक दिन को त्योहार की अभिधा से अभिहित करते हुए मुनि जयेशकुमारजी ने आध्यात्मिक और व्यावहारिक धरातल पर हर रंग की महत्ता को वैज्ञानिक तथ्यों के माध्यम से प्रकट किया। इस अवसर पर मूर्तिपूजक सम्प्रदाय के मुनि निर्भयरत्नविजय जी ने भी अपने विचार प्रकट किए।