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शासनमाता साध्वीप्रमुखा कनकप्रभाजी की पुण्यतिथि पर विविध कार्यक्रम
गांधीनगर स्थित तेरापंथ भवन में आचार्य श्री महाश्रमणजी की सुशिष्या साध्वी संयमलता जी ठाणा 4 के सान्निध्य में शासनमाता साध्वीप्रमुखाश्री कनकप्रभाजी की चतुर्थ पुण्यतिथि पर विशेष कार्यक्रम 'अभ्यर्थना' का आयोजन किया गया। साध्वी श्री द्वारा नमस्कार महामंत्र के मंगल उच्चारण से कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। साध्वी श्री ने अपने उद्बोधन में कहा कि मुमुक्षु कला का जीवन उत्कर्ष, उर्ध्वारोहण व अभ्युदय का सफर था। उन्होंने सकारात्मक सोच के साथ विकास के पायदानों पर कदम बढ़ाते हुए शासनमाता तक का लंबा सफर तय किया। कला से कनकप्रभा, कनकप्रभा से संघ महानिर्देशिका पद तक पहुंचकर उन्होंने नारी समाज का गौरव बढ़ाया। संघ विकास में अपना पुरुषार्थ एवं श्रम नियोजित कर उन्होंने अनेक प्रतिभाओं को उजागर किया। उनका संघ पर अत्यंत उपकार है। आज उनका अभाव हमें खटकता है, लेकिन उनका प्रभाव संघ के हर व्यक्ति के दिल व दिमाग पर है। साध्वी मार्दवश्री जी ने कहा कि साध्वीप्रमुखा एक विलक्षण प्रतिभा की धनी थीं। वे अपने कर्तृत्व एवं श्रम से असाधारण बन गई थीं। कोई उन्हें बौद्ध भिक्षुणी के रूप में देखता था, कोई मदर टेरेसा के रूप में, तो किसी को उनमें सरस्वती का स्वरूप दिखाई देता था। साध्वी मनीषाप्रभाजी ने उनके अनुशासन का प्रभाव बताते हुए कहा कि उनका जीवन मर्यादित व अनुशासित था। साध्वी रौनकप्रभाजी ने उन्हें एक उन्नत व्यक्तित्व बताते हुए मधुर गीतिका का संगान किया। सभा अध्यक्ष पारसमल भंसाली ने स्वागत वक्तव्य देते हुए आज के कार्यक्रम तथा होली चातुर्मास गांधीनगर को प्रदान कराने हेतु साध्वीश्री के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की। सभा मंत्री विनोद छाजेड़ ने अपने विचार व्यक्त किए। इस अवसर पर महिला मंडल एवं ज्ञानशाला तथा तेरापंथ युवक परिषद की भजन मंडली 'प्रज्ञा संगीत सुधा' द्वारा शासनमाता के प्रति गीतिका के माध्यम से भावांजलि अर्पित की गई। मुख्य अतिथि के रूप में पधारी पूर्व मेयर पद्मावती ने भी अपनी भावांजलि अर्पित की। इस विशेष अवसर पर बैंगलोर की विभिन्न संघीय संस्थाओं के पदाधिकारी, कार्यकर्ता, अनेक गणमान्यजन एवं श्रावक श्राविका समाज उपस्थित थे। कार्यक्रम का कुशल संचालन साध्वी मार्दवश्रीजी ने किया तथा आभार ज्ञापन कार्यक्रम संयोजक राजेंद्र बैद ने किया।