‘अपनी संस्कृति, अपने संस्कार’ विषयक कार्यशाला का आयोजन

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‘अपनी संस्कृति, अपने संस्कार’ विषयक कार्यशाला का आयोजन

काकीनाड़ा, आंध्र प्रदेश।
काकीनाड़ा शहर में कृष्णा अर्पाटमेंट में गुजराती हॉल में मुनि दीप कुमार जी के सान्निध्य में ‘अपनी संस्कृति, अपने संस्कार’ विषयक कार्यशाला का आयोजन तेरापंथी सभा काकीनाड़ा द्वारा किया गया। मुनि दीप कुमार जी ने कहा कि जैसी संस्कृति होती है, वैसे संस्कार होते हैं। जब तक यह सामंजस्य बना रहेगा तब तक व्यक्ति और उसका व्यवहार दोनों की सुरक्षा होगी। दूसरे शब्दों में धर्म और धार्मिक दोनों की सुरक्षा हो सकेगी। भारतीय संस्कृति गौरवपूर्ण संस्कृति रही है। अत्यंत प्रेरक रही है। जैनों की भी अपनी संस्कृति रही है। जिसे मानव संस्कृति, विश्व संस्कृति भी कहा जा सकता है।
मुनिश्री ने भावी पीढ़ी को संबोधित करते हुए कहा कि आज की पीढ़ी ने बहुत विकास किया है पर सावधान रहने की जरूरत है। विकास तो बहुत हुआ और संस्कारों में कमी आई है। गलत संगत से बचें, गलत आदतों से दूर रहें। नशामुक्त और मांसाहार पर दूरी बनी रहे। मर्यादा में रहें। अभिभावक भी बच्चों को भले उपहार दें, पर साथ में संस्कार जरूर दें। बालमुनि काव्य कुमार जी ने कहा कि जीवन में संस्कारों का सबसे ऊँचा स्थान होता है। संस्कार जीवन का आधार है। संस्कार बिना जीवन बेकार है। विनय, सहनशीलता, मृदुता, विमलता यह संस्कार जिसमें होते हैं वह विकास करता है। संस्कार के निर्माण में माँ का बहुत योगदान रहता है। माँ जन्मदात्री ही नहीं, संस्कारदात्री भी होती है। कार्यक्रम के प्रारंभ में तेममं, काकीनाड़ा की बहनों ने मंगलाचरण किया। उपस्थिति अच्छी रही।