अभातेममं की नवमनोनीत अध्यक्षा सरिता डागा

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नंदनवन।

अभातेममं की नवमनोनीत अध्यक्षा सरिता डागा

नंदनवन।
अभातेममं के सत्र-2023-2025 के लिए नवमनोनीत राष्ट्रीय अध्यक्ष सरिता डागा सहज, सरल, चिंतनशील एवं समाजसेवा में समर्पित व्यक्तित्व की धनी हैं। आपका जन्म राजस्थान के धार्मिक स्थल, तेरापंथ की वीर भूमि बीदासर में मांगीलाल सज्जन देवी बैद के घर हुआ। तीन भाई-बहनों में सबसे बड़ी सरिता बचपन से ही शिक्षा में अव्वल एवं कुशाग्र बुद्धि वाली थी। धार्मिक संस्कार आपको विरासत में मिले एवं उसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए आपकी संस्कारित धार्मिक चर्या परिणय बंधन के बाद भी अनवरत रही। श्रीडूंगरगढ़ के प्रतिष्ठित, धार्मिक जयपुर प्रवासी डागा परिवार तेजकरण-हुलासी देवी डागा के ज्येष्ठ पुत्र दौलत डागा के साथ आपकी शादी हुई। दौलत डागा भी समाज की स्थानीय एवं केंद्रीय विभिन्न संस्थाओं में अनेक पदों पर कुशलता से दायित्व निर्वहन कर चुके हैं एवं वर्तमान में केंद्रीय संस्था अणुविभा के आप सह-प्रबंध न्यासी हैं। सरिता की शादी के कुछ वर्षों बाद ही आपके सास-ससुर का एक दुर्घटना में आकस्मिक निधन हो गया। परिवार में दौलत डागा के तीन छोटे भाइयों यानी सरिता डागा के तीन देवरों की शादी का दायित्व बोध और ज्येष्ठ वधू के नाते पूरे परिवार को संभालना एक कसौटी भरा अवसर था, पर आज यह चार भाइयों का संयुक्त परिवार समाज के लिए अनुकरणीय उदाहरण एवं एक आदर्श परिवार के रूप में प्रतिष्ठित है।
सार-ससुर की प्रेरणा से शादी के पश्चात शीघ्र ही सरिता डागा तेरापंथ महिला मंडल की गतिविधियों एवं समाज सेवा के अनेक प्रकल्पों से जुड़ गई। लगभग 20 वर्षों तक आप तेरापंथ महिला मंडल, सी-स्कीम, जयपुर के विभिन्न पदों पर दायित्व निर्वहन करते हुए सत्र-2009-2011 में आपने सफल अध्यक्षीय कार्यकाल पूरा किया। आपकी कार्यकुशलता, समर्पण भाव और प्रतिभा का मूल्यांकन करते हुए अखिल भारतीय तेरापंथ महिला मंडल ने 2011-2013 में प्रचार-प्रसार मंत्री के रूप में केंद्रीय टीम में जोड़ा। 2013-2015 में फिर प्रचार-प्रसार मंत्री एवं 2015-2017 तथा 2017-2019 में कोषाध्यक्ष के दायित्व निर्वहन के बाद 2017-2019, 2019-2021 में उपाध्यक्ष पद पर सक्रियता से कार्य किया एवं मंडल की गतिविधियों एवं योजनाओं में अपने पुरुषार्थ का समुचित उपयोग किया। 2021-2023 की केंद्रीय टीम में आपको वरिष्ठ उपाध्यक्ष के रूप में मनोनीत किया गया। 5 राष्ट्रीय अध्यक्षों के साथ 12 वर्षों का कार्यकाल और पूर्वार्द्ध में 20 वर्षों तक स्थानीय मंडल के कार्य में कुल 32 वर्षों से आपने तेरापंथ महिला मंडल के साथ एक सक्रिय, जागरूक सैनानी की तरह कुशलता से कार्य किया।
आचार्यों एवं शासनमाता तथा साध्वीप्रमुखाश्रीजी की कृपा दृष्टि एवं चारित्रात्माओं के प्रति सेवा भावना से आपकी पहचान एक सुश्राविका के रूप में बन गई।
हंसमुख व्यवहार, चेहरे पर स्मित मुस्कान, सहज उदारता एवं आपकी प्रमोद भावना सबको सम्मोहित करती है। नियमित सामायिक, त्याग, तप आदि आपकी दिनचर्या के अंग हैं। समय-समय पर आपने कई तपस्याएँ भी की हैं। धार्मिक एवं सामाजिक गतिविधियों में तन, मन, धन से संलग्न आपका जीवन सतत अप्रमत्तता का जीवन है। संघीय गतिविधियों में आपकी सहभागिता सदैव परिलक्षित रहती है। तेरापंथ समाज की संस्थाओं के अलावा आप भारत जैन महामंडल की कार्यकारिणी सदस्य, रूवा महिला संगठन की कार्यकारिणी के साथ-साथ आप अनेक सामाजिक, शैक्षणिक संस्थानों से जुड़ी हुई हैं।