अणुव्रत सिखाता है इच्छाओं पर नियंत्रण

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अणुव्रत सिखाता है इच्छाओं पर नियंत्रण

गंगाशहर।
आचार्य तुलसी शांति प्रतिष्ठान, गंगाशहर में आचार्यश्री तुलसी मासिक पुण्यतिथि पर आयोजित कार्यक्रम में मुनि चैतन्य कुमार जी ‘अमन’ ने कहा कि सुख का राजमार्ग हैµइच्छाओं का अल्पीकरण। व्यक्ति की इच्छाएँ अनंत होती हैं। उन अंतहीन इच्छाओं की पूर्ति करना संभव नहीं है। ज्यों-ज्यों व्यक्ति की इच्छाएँ बढ़ती हैं, त्यों-त्यों वह और अधिक दुख का अनुभव करता है। इच्छा एक रोग है, जीवन का अभिशाप है। अतः व्यक्ति अपनी इच्छाओं को जितना सीमित करता है, उतना वह सुख, आनंद व शांति का अनुभव कर सकता है।
मुनिश्री ने बताया कि व्यक्ति सुखाकांक्षी होता है, वह दुःख चाहता नहीं है फिर भी दुःख आ जाता है। आचार्य तुलसी ने अणुव्रत आंदोलन का सूत्रपात किया। अणुव्रत को स्वीकार करके व्यक्ति अपनी इच्छाओं पर नियंत्रण कर सकता है। इस अवसर पर मुनि श्रेयांस कुमार जी ने आचार्य तुलसी के प्रति श्रद्धा व्यक्त करते हुए गीत का संगान किया। मुनि विमल विहारी ने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम में आचार्य तुलसी शांति प्रतिष्ठान के उपाध्यक्ष किशनलाल बैद ने संतों का स्वागत करते हुए अपने विचार रखे। आचार्य तुलसी शांति प्रतिष्ठान में निरंतर आध्यात्मिक गतिविधियों के संचालन हेतु आशीर्वद प्रदान किया।