रंगों के त्यौहार होली पर विशेष कार्यक्रम आयोजित

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रंगों के त्यौहार होली पर विशेष कार्यक्रम आयोजित

‘शासन गौरव’ बहुश्रुत साध्वीश्री कनकश्रीजी के पावन सान्निध्य में शासनमाता साध्वीप्रमुखा श्री कनकप्रभाजी की द्वितीय वार्षिक पुण्यतिथि तथा रंगों का त्यौहार होली पर विशेष कार्यक्रम आयोजित हुआ। नमस्कार महामंत्र तथा ‘ऊं हीं श्रीं क्लीं शासनमात्रे नमः’ के सामूहिक मंत्रोच्चार से कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। अणुविभा केन्द्र के महाप्रज्ञ सभागार में आयोजित गरिमामय कार्यक्रम को संबोधित करते हुए साध्वीश्री ने अपनी विनयांजलि समर्पित करते हुए कहा साध्वीप्रमुखाश्री कनकप्रभाजी तप, त्याग व समर्पण की मूरत थी। उनके व्यक्तित्व व कर्तृत्व की चमक विलक्षण थी।
उन्होंने कठोर तपस्या व अथक श्रम से जो सिद्धियां हासिल की वे युगों-युगों तक अमिट रहेंगी। उनकी निष्काम साधना की ही निष्पत्ति है कि वे अनेक पदों, संबोधनों से ऊपर उठकर शासनमाता बन गई। महाप्राण आचार्यश्री तुलसी व शासनमाता में अनेक समानताओं को उजागर करते हुए साध्वीश्री ने उनकी साहित्यिक प्रतिभा व अवदानों की चर्चा की। महातपस्वी आचार्यश्री महाश्रमणजी की अभिवंदना करते हुए साध्वीश्री ने कहा-आपने अमृत महोत्सव मना कर शासनमाता को जो सम्मान दिया वह महावीर की परंपरा का दुर्लभ दस्तावेज बन गया।
साध्वी कनकश्रीजी द्वारा विविध राग-रागिनियों में गुंफित गीत को प्रस्तुत करते हुए साध्वीश्री मधुलता जी, साध्वी मधुलेखाजी, साध्वी समितिप्रभाजी एवं साध्वी संस्कृति प्रभाजी ने शासनमाता के विविध जीवन प्रसंगों को समवेत स्वरों में प्रस्तुति की। महिला मंडल जयपुर शहर की बहनों ने भावपूर्ण गीतिका द्वारा आस्थसिक्त अभिव्यक्ति दी। महिला मंडल अध्यक्षा नीरू मेहता, अणुव्रत समिति अध्यक्ष विमल गोलछा, तेरापंथ सभा उपाध्यक्ष सुरेश बरड़िया व वरिष्ठ कार्यकर्त्ता राजकुमार बरड़िया ने अपने विचार प्रस्तुत किए। कार्यक्रम का सफल संयोजन साध्वी समितिप्रभाजी ने किया।
साध्वी मधुलताजी ने रंगों का त्योहार होली पर विशेष प्रवचन करते हुए कहा- प्रकृति से लेकर संस्कृति तक हमारी दुनिया बहुरंगी है। रंग हमारे बाहर और भीतर के व्यक्तित्व को प्रभावित और निर्मित करते हैं। पवित्र और सुनहरे रंगों पर ध्यान करने से प्रशस्त भावधारा का निर्माण होता है, लेश्याचक्र विशुद्ध होता है और आभामंडल प्रभावी बनता है। साध्वीश्री ने चैतन्य केन्द्रों पर नमस्कार महामंत्र के पांचों पदों के साथ रंगों का ध्यान कराया।