तस्वीर तेरी ही समाई है

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साध्वी मौलिकयशा

तस्वीर तेरी ही समाई है

आंखों में मेरे तस्वीर तेरी ही समाई है।
हर पल हर क्षण खोजे ये मन मुझे तेरीऽऽ याद आई है।।
तुलसी की कृति निराली, सबने ये माना था।
गुरु वचनों पे चलना, प्रण को निभाया था।
तीनों गुरुओं के दिल, को जीत लियाऽऽऽ,
शम, श्रम, सम मय जीवन, गीत रहा।।
अद्वितीय, असाधारण साध्वीप्रमुखा थे।
महानिर्देशिका महाश्रमणी कहाते थे।
शासनमाता बनकर संभाला हमें,
साध्वी समाज तेरा ऋणी रहे ।।
महावीर ने चुनी दिवाली, तुम्हें भायी होली थी।
जन उद्वार करने, खुली तेरी झोली थी।
हर सांस कहे हर पल, मां तू कहांऽऽऽ,
बिन तेरे लगता है सूना जहां ॥
फाल्गुन पूनम आते ही, आँखें भर आई है।
वर्तमान साध्वी प्रमुखा तेरी परछाई है।
भैक्षव शासन नंदन, वन ये मिलाऽऽऽ,
महाश्रमण साये में जीवन खिला ।।
तर्ज : आंखों में तेरी