गुरुवाणी/ केन्द्र
जीवन में बना रहे धर्म का प्रभाव : आचार्यश्री महाश्रमण
जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के एकादशमाधिशास्ता, अखण्ड परिव्राजक शांतिदूत युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमण जी आज प्रातः मांडा से गतिमान हुए। कंटालिया गांव में प्रवेश से पूर्व ही कंटालिया वासी केे सैंकड़ों श्रद्धालु अपने आराध्य के स्वागत में उपस्थित थे। विशाल स्वागत जुलूस के साथ आचार्य श्री महाश्रमण जी कंटालिया में स्थित तेरापंथ धर्मसंघ के आद्य आचार्य श्री भिक्षु की जन्म स्थली में पधारे। भिक्षु समवसरण में समुपस्थित श्रद्धालुओं को आर्हत् वांग्मय के माध्यम से अमृत देशना प्रदान करते हुए आचार्यश्री महाश्रमणजी ने कहा कि मंगल के संदर्भ में शास्त्र में कहा गया है कि धर्म उत्कृष्ट मंगल है। तीन स्थितियां होती है-उत्कृष्ट मंगल कहा गया है अर्थात इससे बड़ा मंगल कोई दूसरा नहीं होता।
हमारे जीवन में धर्म का बहुत बड़ा महत्व है। धर्म के आगे धन और तन और जन अर्थात जनता की बात बहुत छोटी है। धर्म बड़ी बात होती है। धन, तन और जनता सब यही रह जाएंगे पर धर्म ऐसा तत्व है, उसकी कमाई, उज्ज्वलता आगे भी साथ जाती है। यद्यपि चारित्र साथ नहीं जाता पर आत्मा की निर्मलता की स्थिति आगे साथ रह सकती है। अहिंसा, संयम और तप धर्म है। धर्म के तीन आयाम हैं- अहिंसा संयम और तप। जीवन में यदि अहिंसा, संयम और तप है तो मानना चाहिए कि धर्म हमारे जीवन में है और मंगल हमारे साथ है। यह धर्म जिस व्यक्ति के जीवन में है और जिसका मन धर्म में रहा हुआ है, उसे देव भी नमस्कार करते हैं।
आज हम आचार्यश्री भिक्षु की जन्मस्थली कंटालिया गांव में आए हैं। जो शिशु बहुत बड़ा महापुरूष बन जाता है तो उसका जन्म स्थान का महत्व और गौरव भी बढ़ जाता है। अभी आचार्यश्री भिक्षु का जन्म त्रिशाताब्दी वर्ष चल रहा है। मध्य मंगल के रूप मंे हम महामना आचार्यश्री भिक्षु के जन्म स्थान कंटालिया में आए हैं। क्षेत्र का भी मानो भाग्योदय होता है और ऐसा माता-पिता भी धन्य हो जाते हैं, जिनका पुत्र एक विशेष स्थान प्राप्त कर लेता है। कंटालिया को आचार्यश्री भिक्षु की जन्मस्थली होने का गौरव प्राप्त है उनकी माताजी दीपाजी ने सिंह का स्वप्न देखा और एक विशिष्ट महापुरूष को जन्म देने का गौरव प्राप्त किया। यहां के लोगों ने भी कंटालिया के गौरव को बनाएं रखने का अच्छा प्रयास किया है।
आचार्य प्रवर ने आचार्यश्री भिक्षु की अभिवंदना में ‘भिक्षु म्हारै प्रकट्या जी भरत खेतर में’ गीत का आंशिक संगान किया और कहा कि कंटालिया इस समय भिक्षुमय बना हुआ है। यहां आचार्यश्री भिक्षु जन्म त्रिशाताब्दी के महाचरण का आयोजन है। यहां के लोगों में खूब धर्म की भावना बनी रहे। आचार्य प्रवर के मंगल प्रवचन से पूर्व साध्वीप्रमुखा विश्रुतविभाजी ने आज के निर्धारित विषय- ‘आचार्यश्री भिक्षु और कंटालिया’ पर अपनी विचाराभिव्यक्ति देकर उद्बोधन दिया। उन्होंने कहा कि कंटालिया आचार्यश्री भिक्षु की जन्म भूमि है और जहां व्यक्ति जन्म लेता है उस जगह की मिट्टी का अलग आनंद होता है। आचार्य भिक्षु के कंटालिया के जीवन पर विस्तार से जानकारी प्रदान करने के पश्चात साध्वी प्रमुखाश्रीजी ने कहा कि इतिहास में यह बात हमेशा के लिये अंकित रहेगी कि कंटालिया में तेरापंथ धर्मसंघ को जो दान दिया है, वह कभी भी विस्मृत नहीं किया जा सकता ।
आचार्यश्री के स्वागत में आचार्य भिक्षु जन्मस्थली कंटालिया के अध्यक्ष श्री गौतम एम. सेठिया, संयोजक श्री गौतम जे. सेठिया, श्री गणपत डागा व कंटालिया के ठाकुर श्री नरपतसिंह ने भावाभिव्यक्ति दी। तेरापंथ महिला मंडल कंटालिया ने स्वागत गीत का संगान किया। अखिल भारतीय तेरापंथ युवक परिषद की ओर से श्री अनंत बागरेचा ने ऊँ भिक्षु...ऊँ जय तुलसी... जय। के जप का क्रम की सूचना देते हुए पूज्य प्रवर से पांच बोल सुनाने का आग्रह किया तो पूज्य प्रवर ने जप का प्रयोग भी कराया।