तीर्थंकर भगवान पार्श्व की वाणी से हो सकता है कल्याण : आचार्यश्री महाश्रमण

गुरुवाणी/ केन्द्र

मांडा गांव। 14 दिसंबर, 2025

तीर्थंकर भगवान पार्श्व की वाणी से हो सकता है कल्याण : आचार्यश्री महाश्रमण

जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के वर्तमान अधिशास्ता, तीर्थंकर के प्रतिनिधि युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमण जी ने आज रविवार प्रातःकाल तेरापंथ के आद्य आचार्य, आचार्य श्री भिक्षु की महाप्रयाण स्थली, सिरियारी से मांडा गांव की ओर मंगल प्रस्थान किया। मार्ग में अपनी धवल सेना के साथ निम्बली गांव में भी पधारे। यहां के विद्यार्थियों में आचार्य प्रवर के दर्शन किए तो आचार्य प्रवर ने विद्यार्थियों को पावन प्रतिबोध व यहां के लोगों को मंगल आशीर्वाद प्रदान किया। यहां से पूज्य प्रवर मांडा निवासी श्री प्यारे लाल पीतलिया के निवास स्थान श्री महाश्रमण कुटीर में पधारे। आचार्य मांडा गांव के श्रद्धालुओं ने भी पूज्य प्रवर का भावभीना स्वागत किया।
मुख्य प्रवचन कार्यक्रम में समुपस्थित श्रद्धालुओं को आचार्य श्री महाश्रमण जी ने पावन प्रतिबोध प्रदान करते हुए कहा कि जैन परंपरा में चौबीस तीर्थंकरों की बात बताई गई है। वर्तमान अवसर्पिणी और इस भरतक्षेत्र के प्रथम तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव और २३ वें तीर्थंकर भगवान पार्श्वनाथ हुए। आज पौष कृष्णा दशमी है और पार्श्व जयन्ती है। भगवान पार्श्व की लोकप्रियता अधिक नजर आती है। भगवान पार्श्वनाथ को ‘‘पुरूषादानीय’’ विशेषण से भी उपमित किया गया है। पूरे भारत में जितने मंदिर भगवान पार्श्व के मिलते हैं, उतने अन्य तीर्थंकरों के नहीं मिलते हैं। भगवान पार्श्व के मंत्र स्तोत्र बहुत मिलते हैं, इतने अन्य तीर्थंकरों के नहीं मिलते हैं। कल्याण मंदिर और उवसर्गहर स्तोत्र भगवान पार्श्व से जुड़े हुए हैं। आज भगवान पार्श्व की जयंती है। दुनिया में विशिष्ट महापुरूष समय-समय पर पैदा होते रहते हैं और यह दुनिया का मानो सौभाग्य होता है। भगवान पार्श्व या अन्य तीर्थंकरो की वाणी से कितनों का कल्याण हो सकता है। आचार्य श्री ने उसकी स्तुति में प्रभु पार्श्व देव चरणों में’’ गीत का संगान किया।
आचार्य प्रवर ने कहा कि आज हमारा मांडा गांव में आना हुआ है। यह आचार्य श्री भिक्षु और आसो जी से किसी रूप में जुड़ा हुआ है। यहां के लोगों में खूब धार्मिक भावना बनी रहे। आचार्य श्री के स्वागत में सर्वप्रथम माण्डा निवासी श्री लारेलाल पीतलिया ने अपनी श्रद्धाभिव्यक्ति दी। स्थानीय सरपंच श्री हरीसिंह, पूर्व सरपंच श्री रणजीत सिंह ने अपनी भावनाओं की अभिव्यक्ति दी। तेरापंथ महिला मंडल ने गीत का संगान किया। नारकोटिक्सकी कन्ट्रोल ब्यूरो में कार्यरत श्री नरपत सिंह ने भी अपनी भावाभिव्यक्ति दी। श्रीमती पिंकी पीतलिया, श्री प्रदीप पीतलिया ने भी अपनी श्रद्धाशक्ति अभिव्यक्ति दी।